Odisha Resolution 2 (H)

स्वदेशी माॅडल से ही बचेगी धरती

एकमात्र जीवनपोषी ग्रह पृथ्वी तेजी से विनाश की ओर बढ़ रही है। अगले पचास वर्षों या उससे कम में ही इसका
पारिस्थितिक तंत्र नष्ट हो सकता है। जलवायु परिवर्तन पर बनी अंतर्राष्ट्रीय सचेतक संस्था (आई.पी.सी.सी.) ने 27
सितंबर, 2014 को अपनी 50वीं आकलन रिपोर्ट में इस संबंध में अंतिम चेतावनी दे दी है। इस रिपोर्ट के कुछ अंश
निम्नवत है -

1) आज वातावरण में पिछले 800,000 वर्षों से अधिक कार्बनडाइआॅक्साड, मीथेन, नाइट्रस आॅक्साइड जैसी हरित
प्रभाव उत्पन्न करने वाली गैसें हैं।

2) इन हरित प्रभाव वाली गैसों के सतत् उत्सर्जन से वर्ष 2040 तक 2 डिग्री सेल्सियस वैष्विक ताप वृद्धि क्रांतिक
अवरोध (2 डिग्री से. वैरियस) पार हो जायेगा।

3) वर्ष 2050 तक अंटार्कटिका पूर्णतः हिम (बर्फ) रहित हो जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सचेतक संस्था
के पांचवीं आकलन आधारित आख्या जो 20-11-14 को प्रकाषित हुई में कहा गया है किः-
क) वर्ष 2070 तक अतिरिक्त कार्बनडाईआॅक्साइड उत्सर्जन शून्य करना अनिवार्य है।
ख) वर्ष 2100 तक सभी हरित प्रभाव उत्पन्न करने वाली गैसों का अतिरिक्त उत्सर्जन शून्य होना चाहिए।

जलवाुय परिवर्तन के अउत्क्रमणीय (अपरिवर्तनीय), व्यापक एवं गंभीर प्रभावों से बचने के लिए ऐसा
परम् आवष्यक है।

संयुक्त राज्य (यू.के.) के राज समिति (राॅयल सोसायटी) द्वारा हाल में प्रकाषित एक शोध पत्र में चेतावनी दी
गई है कि भारतीय वैष्विक गर्मी (ग्लोबल वार्मिंग) के परिणामतः 10गुना अन्यों से अधिक ताप तरंग भुगतेंगे। इन अत्यंत
घातक चेतावनियों की हम सर्वनाष के मूल्य पर ही उपेक्षा कर सकते हैं। भक्षण के लिए भेडि़या आपका द्वार
खटखटा रहा है। भारत आज प्रत्येक दिन 370 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पाद जला रहा है। विष्व में पेट्रोलियम
उत्पादों के खपत वाला भारत चैथा देष है। प्रदूषण उत्पन्न करने में भी इसका यही स्थान है।

इस पृष्ठभूमि में अगले 25 से 30 वर्ष इस धरा के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और जैसा है चलने दो
कि नीति इस संकट को और आगे बढ़ाने का काम करेगी। ऐसे में स्वदेषी जागरण मंच की 12वीं राष्ट्रीय सभा प्रस्ताव
करती है कि:-
1. दिसंबर माह में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन जो कि पेरू-लीमा में संपन्न हुए, में भारत सरकार के पक्ष की सराहना
और अनुमोदन करते हैं। इस सम्मेलन में भारत सरकार ने कहा कि औद्योगीकरण का लाभ पाष्चात्य देषों ने
उठाया है। दो शताब्दियों तक प्राकृतिक संसाधनों का उन्होंने दोहन किया तथा अपना ही नहीं हमारा भी
पर्यावरण प्रदूषित किया। अब समय है कि भारत जैसे विकासषील देषों को पाष्चात्य देष थोड़ा अवकाष दें
तथा ‘‘पाल्यूटर पेज्’’ (प्रदूषक भुगते) सिद्धांत पर विकास हेतु हरित तकनीक उपलब्ध करायें। स्वदेषी जागरण
मंच सरकार से यह आग्रह करती है कि वो संयुक्त राष्ट्र के आगामी सम्मेलन जो वर्ष 2015 में पेरिस में
आयोजित है, में अपने वर्तमान कथन पर दृढ़ रहे।

2. साथ ही भारत सरकार भी अपने विकास नीति में प्रावधान करे कि न्यूनतम प्रदूषणकारी तकनीकों को बढ़ावा
मिले तथा जनसाधारण को सौर ऊर्जा जैसे पर्यावरण हितैषी विकल्पों को वरण करने के लिए प्रोत्साहित करे।
व्यक्तिगत यातायात साधनों के स्थान पर जन यातायात साधन जैसे विकल्प पर्यावरण संरक्षण में निष्चित मदद
करेंगे।

3. स्वदेषी जागरण मंच देष की राष्ट्रभक्त जनता से भी अपील करती है कि पर्यावरणीय संकट की गंभीरता को
समझते हुए सरकार के पर्यावरण को बचाने में प्रयासों में न केवल सहयोग करें, बल्कि पर्यावरणीय पोषक
जीवन पद्धति जैसे निजी एवं सार्वजनिक स्वच्छता, जल, बिजली, भोजन इत्यादि की न्यूनतम बर्बादी इत्यादि।
यदि हम पर्यावरण को बचा पाते हैं तो पर्यावरण हमें बचायेगा। यदि हम इसे नष्ट करते हैं तो ये निष्चित हमें
नष्ट कर देगा। हमें चुनाव करना है।