Odisha Resolution 3 (H)

विदेषी कंपनियों को आमंत्रण बंद करो

स्वदेषी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय परिषद सभा सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को आमंत्रण दिये जाने के लिए
गंभीर चिंता व्यक्त करती है। स्वदेशी जागरण मंच की यह स्पष्ट मान्यता है कि पिछले दो दशकों से चल रहे भूमंडलीकरण का देश
की अर्थव्यवस्था पर विध्वंसकारी प्रभाव पड़ा है। आज देश पर कर्ज जीडीपी का 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो हमें दुनिया के
सबसे अधिक कर्जदार देशों की श्रेणी में खड़ा कर रहा है। सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 52 प्रतिषत ग्रामीण कर्ज में डूब
चुके हैं।

स्वदेशी जागरण मंच दिसंबर 2013 तिरूवंनतपुरम के राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रस्ताव को दोहराता है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में
विदेशी पूंजी की सीमाओं को बढ़ाने और विदेशियों को देश में आमंत्रण देने से पहले पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से चल रही
विदेशी निवेश के नये नफे-नुकसानों के बारे में एक श्वेत पत्र जारी करे। स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय सभा 280 से ज्यादा
संगठनों और संस्थाओं के जयपुर में आयोजित स्वदेशी संगम के उस घोषणा पत्र का यहा अनुमोदन करती है कि वर्तमान सरकार को
वर्तमान नारे ‘मेक इन इंडिया’ का नारा विदेशी कंपनियों को आमंत्रण सरीखा है। स्वदेशी जागरण मंच की स्पष्ट मान्यता है कि भारत
जो पी.एस.एल.वी., अंतरिक्ष उपग्रह, आणविक बम, मिसाईल समेत उत्कृष्ट उत्पादन कर सकता है और जिस देश के लोगों ने अपनी
कुशाग्र बुद्धि, कौशल, मेहनत और लगन के लिए दुनिया में अपना लोहा मनवाया है, उस देश की सरकार को देश निर्माण के लिए
विदेशियों की और देखने की जरूरत नहीं है।

सरकार केबिनेट द्वारा बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को वर्तमान 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करना, स्वदेशी
जागरण मंच के संघर्ष के परिणामस्वरूप एन.डी.ए.-1 के उस संकल्प का उल्लंघन है, जिसमें सरकार द्वारा संसद में वचन दिया गया
था कि विदेशी निवेश की सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जायेगा।

स्वदेशी जागरण मंच का मानना है कि बीमा में विदेशी कंपनियों का आगमन शुभ नहीं रहा है। विदेशी भागीदारी वाली जीवन
बीमा कंपनियों में पाॅलिसी बंदी और जब्ती अनुपात 50 प्रतिशत और उससे भी ज्यादा होना, साधारण और स्वास्थ्य बीमा में बढ़ते
प्रीमियम और घटते क्लेम अनुपात आज मुख्य चिंता का विषय बने हुए हैं। यह खुला सत्य है कि विश्व की प्रमुख बीमा कंपनियां
दिवालियेपन के कगार पर हंै और अमरीकी सरकार की 170 अरब डालर की सहायता के बाद ही दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ए.
आई.जी. को डूबने से बचाया जा सका। ऐसी खोखली कंपनियां हमारे देश के बीमा क्षेत्र का क्या भला करेंगी, यह समय के परे है।
यही नहीं बीमा और पंेशन फंड़ों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देश की बहुमूल्य बचत पर विदेशी कंपनियों का आधिपत्य जरूर बढ़ा
देगा।

सरकार की विदेशी निवेश प्रोत्साहन नीति के कारण, कृषि क्षेत्र में भी अनुबंध पर कृषि के माध्यम से विदेशी कंपनियां प्रवेश कर
रही है और उनके कारण जी.एम. फसलों के नाम पर देश की जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा पर तो संकट है ही, देश की पूरी कृषि
व्यवस्था भी ये कंपनियां हस्तगत करने की तैयारी में हैं।

पहले से ही चोर दरवाजे से थोक व्यापार के नाम पर ‘कैश एण्ड कैरी’ को अनुमति की मार झेल रहा देश का खुदरा व्यापार
अब ‘मार्केट प्लेस’ के नाम पर विदेशी ई-काॅमर्स कंपनियांें द्वारा गैरनकानूनी कृत्यों से अब चैपट हो रहा है। उन कंपनियों को
प्रतिबंधित करने की बजाए, सरकार द्वारा ई-काॅमर्स में विदेशी कंपनियांे को सीधे आमंत्रण देश के खुदरा व्यापार को समाप्त कर
देगा। स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय सभा, सरकार से मांग करती है कि विदेशी कंपनियों को ई-काॅमर्स में अनुमति न दे और
विदेशी कंपनियों द्वारा चोर दरवाजे से व्यापार पर रोक लगाने हेतु नियमों को दुरूस्त करे।

इसी क्रम में, चीन जो बार-बार घुसपैठ से देश की सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न कर रहा है, उसके साथ विदेशी निवेश संवद्र्वन
के समझौते और भी चिंताजनक हैं। स्वदेशी जागरण मंच यह मानता है कि देश में मैन्यूफैक्चरिंग का विकास सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों
के माध्यम से ही हो सकता है। पिछली एन.डी.ए. सरकार द्वारा लघु उद्योगों के प्लांट और मशीनरी में निवेश की सीमा को 3 करोड़
से घटाकर एक करोड़ किया गया था, जिसे पिछली यूपीए सरकार ने 5 करोड़ कर दिया था। स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय सभा
यह मांग करती है कि इस सीमा बढ़ाने की कवायद बंद की जाए, ताकि विदेशी कंपनियों का इस क्षेत्र में वर्चस्व न बना सके।
इस सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ के नारे के बारे में प्रश्न उठाये जा रहे हैं,। हाल ही में एक टीवी चैनल द्वारा इस संबंध में
एस.एम.एस. वोटिंग में यह पाया गया कि 68 प्रतिशत लोग सरकार की मेक इन इंडिया नीति के बजाय स्वदेशी जागरण मंच के मेड
बाय इंडिया की मांग को सही मानते हैं। कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा भी निर्यात आधारित, मेक इन इंडिया नीति को सही नहीं
बताया गया है।

अतः स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय सभा यह मांग करती है कि विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने की मेक इन इंडिया की
नीति का परित्याग किया जाए। भारतीय प्रतिभा, कौशल और संसाधनों पर विश्वास करते हुए देश के विकास की रणनीति तैयार हो।