स्वदेशी जागरण मंच का चीनी कंपनियों पर डाटा चोरी का आरोप, प्रतिबंध की मांग

पुलवामा जैसी आतंकी घटनाएं देश को हर मोर्चे पर सतर्क होने के लिए प्रेरित कर रही हैं। जमीनी आतंकवाद के बाद देश को सबसे बड़ा खतरा साइबर आतंकवाद से है। दुश्मन देश विभिन्न ऐप्स के जरिये लोगों के संवेदनशील आंकड़े चुरा सकते हैं, और इसके माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था या सुरक्षा को तबाह कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इन ऐप्स पर इंडोनेशिया सहित कई देशों में पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक डॉ. अश्विनी महाजन ने सोमवार को प्रधानमंत्री को लिखे इस पत्र में कहा है कि चीन की कंपनियां भारत के हर बाजार में किसी भी कीमत पर घुसने की कीमत कर रही हैं। कई सौदों में वे इतने निम्न मूल्य पर समझौते कर रही हैं जितना कोई प्रोफेशनल कंपनी कभी नहीं कर सकतीं। संगठन की चिंता है कि यह सब चीन की सरकार की सह के बिना संभव नहीं हो सकता। चीन की कंपनियां मोबाइल बनाने, ऐप्स डवलप करने सहित अनेक काम में लगी हुई हैं। इससे संवेदनशील लोगों की सूचनाएं चीन जैसे देश को पहुंचने का खतरा बना हुआ है जो देश के लिए खतरा बन सकता है।

संगठन के मुताबिक इसके पहले भी भारत सरकार ने दिसंबर 2017 में 42 ऐप्स पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाया था। चीन के यूसी ब्राउजर पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।

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