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जमीन पर उतरता जल जीवन मिशन

पीएम ने योजना को विस्तार देते हुए सभी जनों को जल सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की घोषणा की थी, इसके अंतर्गत प्रत्येक शहरी मकान में नल से जल उपलब्ध कराने के अलावा सीवर लाइन बिछाने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के जलाशयों के पुनरुद्धार और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा। — डाॅ. दिनेश प्रसाद मिश्र

 

केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण  ने 2022- 23  का बजट पेश करते हुए जीवन मिशन के अंतर्गत 3.8 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाने के लिए 60 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। पिछले 2 साल में इस योजना के अंतर्गत 5.5 करोड़ घरों को नल से जल उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्ष 2022 23 में 3.8 करोड़ परिवारों को इस मिशन के अंतर्गत नल से जल पहुंचाने हेतु इस योजना को अत्यंत महत्व प्रदान करते हुए उक्त धनराशि की व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2019 में माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में जल जीवन मिशन योजना प्रारंभ करने की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य देश के सभी घरों में पाइप के माध्यम से जल पहुंचाना सुनिश्चित करना था। अब तक देश की आधी आबादी अर्थात 50 प्रतिशत लोगों तक पीने का पानी नहीं पहुंच पाया है और लोगों को पीने के पानी के लिए अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य की सरकारों ने जल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपने अपने स्तर पर कार्य किया है किंतु अभी तक देश में सभी को जल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक परिवार को नियमित तौर पर शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पर्याप्त जल उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारें जल जीवन मिशन की पूर्ति हेतु कार्य करेंगी। इस अभियान में जल के संरक्षण और जल स्रोतों के कायाकल्प के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जल संरक्षण के लिए प्रभावी कदम न उठाए जाने के कारण भूमिगत जल का स्तर निरंतर नीचे जा रहा है, जिसे ऊपर लाने तथा एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त कार्य किए जाने की आवश्यकता है, जिससे पानी से संबंधित समस्त समस्याओं का समाधान हो सके। इस योजना के समक्ष राष्ट्र में जल का अभाव, निरंतर गिरता हुआ जल स्तर तथा जल संरक्षण का समुचित प्रबंधन न होना योजना को निश्चित समयावधि के अंतर्गत पूर्ण कर पाने के संदर्भ में प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, किंतु निरंतर जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्य कर योजना को मूर्तरूप दिया जा सकता है। 

इस बीच भारतीय घरों में नल के माध्यम से पानी पहुंचाने का कार्य काफी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 से 2018 के मध्य 6.7 प्रतिशत की वृद्धि से घरों में पानी के कनेक्शन के लिए नल लगाए गए। 2011 से 2014 के मध्य में यह आंकड़ा 4 प्रतिशत था और 2001 से 2011 में यह मात्र 0.6 प्रतिशत ही था। पानी के कनेक्शन लगाने और नल से पानी पहुंचाने की दिशा में गांव में वृद्धि का आंकड़ा शहरों से अधिक है। 2014 से 2018 के मध्य गांव में यह 28 प्रतिशत और शहरों में 22 प्रतिशत के करीब रहा। ग्रामीण इलाकों में अभी भी लगभग 60 प्रतिशत घर ऐसे हैं जहां पानी का नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है। उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार जैसे अनेक राज्य अब भी हैं जिनकी आधी जनसंख्या को अभी भी पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां 70 प्रतिशत से अधिक घरों में पानी के लिए नल लगाए जा चुके हैं। इन राज्यों के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में नल का प्रयोग पानी के लिए किया जा रहा है।         

जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को 10870.5 करोड रुपए आवंटित किए हैं जो किसी भी राज्य को अब तक की सबसे अधिक धनराशि है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल को 6998.97 करोड, गुजरात को 3410 करोड़ और म.प्र. को 5117 करोड़, महाराष्ट्र को 7064.41 करोड़ तथा छत्तीसगढ़ को 1908.9 करोड रु. आवंटित किए गए हैं। पूर्वोत्तर राज्यों को कुल 9262 करोड आवंटित किए गए हैं। जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराना है।

नल से घर-घर जल पहुंचाने की योजना के अंतर्गत जहां एक ओर देश के तेलंगाना तथा गोवा राज्य सहित कुछ केंद्र शासित प्रदेशों ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर अभूतपूर्व कार्य किया है, वहीं छत्तीसगढ़ उत्तराखंड जैसे राज्य  अत्यंत धीमी गति से कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। अब तक देश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगभग 43 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचा दिया गया है 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 प्रतिशत घरों में इस योजना के माध्यम से जल की आपूर्ति की जा रही है। गोवा तेलंगाना अंडमान और निकोबार दीप समूह पुडुचेरी दादरा और नगर हवेली दमन और दीव के अलावा हरियाणा के 100 प्रतिशत घरों में नल से जल की आपूर्ति की जा रही हैं। योजना को मूर्त रूप देने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा समय सीमा का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बिहार पंजाब गुजरात हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर लद्दाख मेघालय सिक्किम आदि राज्यों तथा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में यह योजना 2022 तक मूर्त रूप ले सकेगी। उत्तर प्रदेश उत्तराखंड पश्चिम बंगाल छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में 2024 तक हर घर में नल से जल प्राप्त हो सकेगा। हालांकि आधिकारिक आंकड़े बताते हैं की 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 25 प्रतिशत से कम  घरों में नल से जल की आपूर्ति की जा रही है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में असम 22 प्रतिशत राजस्थान 20.89 प्रतिशत लद्दाख 16.32 प्रतिशत झारखंड 15.12 प्रतिशत बंगाल 13.48 प्रतिशत छत्तीसगढ़ 13.17 प्रतिशत और उ.प्र 12.72 प्रतिशत शामिल है। 

जल शक्ति मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अभी तक कुल 19,22,49,980 घरों में से 8,31,03,880 घरों में नल से जल पहुंचा दिया गया है जो निर्धारित लक्ष्य का मात्र 43.23 प्रतिशत होता है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है जिसे पूर्ण करने हेतु अथक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। आंकड़ों के अनुसार 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 100 प्रतिशत स्कूलों में जबकि 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 75 प्रतिशत स्कूलों तक यह सुविधा पहुंचा दी गई है, झारखंड एकमात्र राज्य है जहां के सिर्फ 17.97 प्रतिशत स्कूलों में ही नल से जल की आपूर्ति अभी तक सुनिश्चित हो पाई है। 

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन को प्रभावी करने हेतु 4 चरणों में कार्य को विभाजित कर संपन्न किया जा रहा है। प्रथम चरण में बुंदेलखंड के 7 जिलों झांसी महोबा ललितपुर जालौन हमीरपुर बांदा और चित्रकूट के कुल 4513 राजस्व ग्रामों में से 891 ग्रामों में जल घर घर नल योजना के अंतर्गत पहुंचाया जा रहा है। शेष 3622 ग्रामों को घर घर नल से जल पहुंचाने का कार्य 479 योजनाओं के माध्यम से पूर्ण किया जा रहा है। इससे लगभग 67 लाख की आबादी लाभान्वित होगी। दूसरे चरण में विंध्य क्षेत्र के मिर्जापुर और सोनभद्र तथा वाराणसी में प्रधानमंत्री जी द्वारा योजना की आधारशिला रखने के साथ ही कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। तीसरे चरण में जापानी बुखार और इंसेफलाइटिस से प्रभावित क्षेत्रों को योजना से जोड़ा जाएगा। चैथे चरण में आर्सैनिक व फ्लोराइड से प्रभावित गंगा यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों में काम शुरू होगा। इस मिशन के अंतर्गत मेंटेनेंस का कार्य अगले 10 वर्षों तक कार्यदाई संस्था ही करेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही साथ इस योजना के अंतर्गत देश के प्रत्येक शहर के हर घर को जल्द ही नल से शुद्ध जल की आपूर्ति होने लगेगी ।इसके लिए जल सुरक्षा के मामले में सब शहरों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। शहरी जल जीवन मिशन नामक इस योजना के पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के लिए सौ स्टार्टअप चयनित जाएंगे। जल प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में नवीनतम तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टप को इसके लिए आमंत्रित किया गया है इस योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों के जल स्रोतों और जल संचयन को संरक्षित करने और सीवर के जल को दोबारा उपयोग मे लाने हेतु विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। 

पीएम मोदी ने शहरों की जल सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अटल मिशन फॉर रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉरमेशन अमृत योजना के दूसरे चरण की शुरुआत अक्टूबर 2021 में की थी। अमृत योजना का पहला चरण वर्ष 2005 में शुरू हुआ था जो 500 शहरों तक ही सीमित था। पीएम ने योजना को विस्तार देते हुए सभी जनों को जल सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की घोषणा की थी, इसके अंतर्गत प्रत्येक शहरी मकान में नल से जल उपलब्ध कराने के अलावा सीवर लाइन बिछाने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के जलाशयों के पुनरुद्धार और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा।

आज देश के बड़े भूभाग में निरंतर जल संकट उत्पन्न होने, भूगर्भ जलस्तर के नीचे जाने तथा जल स्रोतों के निरंतर नष्ट होते जाने के कारण जल की उपलब्धता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है।  

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