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अग्निपथ योजना को समझने की जरुरत

सेना में भारत के हितों की सर्वोच्चता व आधुनिकता ही दिखाई दी जानी चाहिए जो अग्निपथ योजना में निहित है। — डॉ. सूर्यप्रकाश अग्रवाल

 

भारत की केन्द्र सरकार ने 14 जून 2022 को सेवा में भर्ती करने के लिए अग्निपथ योजना घोषित की। घोषणा के दो तीन बाद से ही बिहार राज्य व उसके आस-पास के क्षेत्रों में युवाओं ने योजना का विरोध अग्निपथ योजना को बिना समझे ही शुरु कर दिया। प्रतीत होता था कि यह विरोध विशुद्ध रुप से विभिन्न विरेधी राजनीतिक दलों के द्वारा प्रायोजित था क्योंकि जैसे ही अग्निपथ योजना में भर्ती के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरु हुई वैसे ही लाखों युवाओं ने वायु, जल व सेना में पंजीकरण कराना शुरू कर दिया। अग्निपथ योजना को आशातीत सफलता दिखाई देने लगी है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा घोषित अग्निपथ योजना पर 25 जून 2022 को अपना विरोध तेज करने की घोषणा कर दी। कांग्रेस का मानना है कि योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक है। कांग्रेस अग्निपथ योजना के विरोध में एक राजनीतिक अभियान चलाना चाहती है। इस योजना को लेकर कांग्रेस अपना दृष्टिकोण जनता तक पंहुचायेगी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस योजना को ठेका प्रथा की तरह बताते है तथा कृषि कानूनों की तरह ही सरकार को अग्निपथ योजना को भी वापस लेने की मांग कर रहा है। कांग्रेस इस योजना का विरोध संचार के प्रत्येक माध्यमों पर करने की योजना बना रही है।

राष्ट्रीय लोकदल ने भी अग्निपथ योजना का विरोध के लिए आंदोलन करने की रुप रेखा बना रही है। रालोद का मानना है यह योजना युवाओं के साथ एक मजाक है। 3 जुलाई 2022 को जयंन्त चौधरी मुजफ्फरनगर के शाहपुर कस्बे में युवा पंचायत को सबोधित करते हुए है कहा कि सीमा पर देश की रक्षा करने वाला सैनिक 3 साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया जाता है। अग्निपथ योजना को कटघरे में रखते हुए उन्होनें कहा कि 6 महीने की ट्रेनिंग मे अग्निवीर नहीं अपितु अभिमन्युओं को पैदा करेगी जिसको चक्रव्यूह में फंसा कर दुश्मन मिल कर व घेर कर मार डालेंगे। सेना मरने के लिए नहीं होती है अपति मारने के लिए होती है। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य सभा सदस्य जयंत चौधरी ने कहा है कि अग्निपथ योजना के जरिये सरकार किसान आंदोलन का बदला ले रही है। सरकार ने युवाओं को आग में झोंकने का काम किया है तभी इसका नाम अग्निपथ योजना रखा गया है। रालोद के दो विधायकों ने कहा कि अग्निपथ योजना के विरोध में वे अपनी विधायक पैंशन ग्रहण नहीं करेंगे क्योंकि सरकार भी चार साल की भर्ती में युवाओं को पेंशन नहीं देगी।

मेघालय राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बागपत के खेकडा में अपने मित्र गजे सिंह दहाया के निवास पर 24 जून 2022 को पत्रकारों को बताया कि नई भर्ती योजना अग्निपथ योजना जवानोंं के खिलाफ है। युवाओं की उम्मीदों के साथ घोखा है। उनका कहना था कि छह माह जवान ट्रेनिंग करेगा, छह माह की छुटटी, तीन साल की नौकरी करने के बाद जब जवान घर वापस लौटेगा तो उसका ब्याह ही नहीं हो पायेगा। बिहार विधान सभा में 27 जून 2022 को दोनों सदनों ने विपक्ष ने इस योजना का जोरदार विरोध किया। पंजाब की भंगवत सिंह मान की सरकार इस अग्निपथ योजना का विरोध करने के लिए राज्य विधान में प्रस्ताव पारित करवा रही है। इसको विधान सभा का दुरुपयोग ही कहा जा सकता है तथा राज्य सरकार की ओर से अपने अधिकारों का अतिक्रमण भी। पंजाब में कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी की सरकार का समर्थन कर रही है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अग्निपथ योजना को भाजपा का घोटाला बता रही है। ममता बनर्जी ने एक विचित्र मांग करते हुए कहा कि अग्निवीरों की सेवानिवृति की आुय 65 वर्ष की जानी चाहिए। यह ममता बनर्जी की अपरिपक्व सोच तथा इस गम्भीर अग्निपथ योजना के प्रति अपनी अगम्भीरता ही दिखा रही है।

अराजनीतिक अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष योगेन्द्र का कहना है कि अग्निपथ योजना देश के नौजवानों के लिए एक वरदान है। इस योजना से अधिसंख्य युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करके के लिए अवसर प्राप्त हो सकेगा।

अग्निपथ योजना का विरोध राजनीतिक है तथा बिना सोचे समझे व दूरगामी परिणाम की ओर न सोच कर विरोध किया जा रहा है। सेना में भर्ती के प्रति युवाओं के उत्साह से यह सिद्ध होता है कि विरोध जानबूझ कर किया जा रहा है। संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को आवश्यकता से अधिक और देश के हित से भी ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। अतार्किक रवैया अपना कर अन्य राजनीतिक दलों के द्वारा विरोध किया जा रहा है। अब इस योजना के विरोध में किसान संगठन भी शामिल हो रहे है और युवाओं को सही मार्ग नहीं दिख रहे है। केन्द्र सरकार के प्रत्येक फैसले के विरोध की ताक में रहने वाले आंदोलनजीवी भी आग में घी डालने की कोशिश कर रहे हैं। 

विरोध करने वाले राजनीतिक दल व किसान संगठन यह सोच नहीं सके है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सेनाओं में क्या परिवर्तन लाये जा रहे है तथा बदलते परिवेश में सेनाओं की क्या जरुरतें है। विश्व में बहुत से देश ऐसे है जिन्हांने अग्निपथ जैसी योजनाओं का बहुत पहले ही लागू कर दिया था। आगे आने वाले समय में युद्ध मिसाइल, ड्रोन व कृत्रिम बुद्धिमता के द्वारा लड़े जायेंगे। वर्तमान सेना की संरचना व युद्ध करने का ढंग एकदम से बदलने वाला है। समय परिवर्तन के साथ अन्य संगठनों की तरह सेना में भी सभी तौर-तरीकों में संशोधन किये जा सकेंगे। सेना में भारत के हितों की सर्वोच्चता व आधुनिकता ही दिखाई दी जानी चाहिए जो अग्निपथ योजना में निहित है।        

डॉ. सूर्य प्रकाश अग्रवाल सनातन धर्म महाविद्यालय मुजफ्फरनगर 251001 (उ.प्र.), के वाणिज्य संकाय के संकायाध्यक्ष व ऐसोसियेट प्रोफेसर के पद से व महाविद्यालय के प्राचार्य पद से अवकाश प्राप्त हैं तथा स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार है।

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