011 2618 4595

अब परिसीमन पर भड़के कश्मीर के राजनैतिक दल

जम्मू कश्मीर में विधानसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन का काम पूरा हो गया है।  आयोग ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी है और अब मोदी सरकार द्वारा पूर्व में किए गए वादे के अनुरूप जल्द ही इस केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है। — स्वदेशी संवाद

 

जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट आते ही पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए कश्मीर के राजनीतिक दल बखेड़ा खड़ा करने की फिराक में है। भाजपा सहित देश के सभी राष्ट्रीय विचार वाले दलों ने आयोग की सिफारिशों का स्वागत किया है। वहीं पाकिस्तान के साथ-साथ कश्मीर के राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना करते हुए कश्मीरी लोगों के अधिकारों को सुनियोजित तरीके से छीनने का आरोप लगाया है।

जम्मू कश्मीर में विधानसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन का काम पूरा हो गया है।  आयोग ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी है और अब मोदी सरकार द्वारा पूर्व में किए गए वादे के अनुरूप जल्द ही इस केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग ने अपने 2 साल के निर्धारित कार्यकाल में एक कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा करते हुए कश्मीर क्षेत्र में विधानसभा की सीटों की संख्या 47, जबकि जम्मू क्षेत्र में विधानसभा सीटों की संख्या 43 रखने की अनुशंसा की है। आयोग ने जम्मू में 6 अतिरिक्त विधानसभा सीटों और कश्मीर में एक अतिरिक्त सीट का प्रस्ताव दिया है यानी परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटों की संख्या में चार की वृद्धि की है। केंद्र सरकार यदि आयोग की रिपोर्ट को अक्षरशः स्वीकार करते हुए अधिसूचित कर देती है तो जम्मू कश्मीर विधानसभा में सीटों की कुल संख्या अब 90 हो जाएगी। फिलहाल इनकी संख्या 86 है, जिनमें से 40 सीट जम्मू में हैं जबकि 46 सीटें कश्मीर में हैं।

परिसीमन आयोग ने एक समान जनसंख्या अनुपात बनाए रखने के लिए जम्मू क्षेत्र की अधिकांश विधानसभा सीटों की सीमाओं को फिर से निर्धारित किया है और निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में 37 से बढ़ाकर 43 कर दी है। आयोग ने जम्मू में अनुसूचित जाति को 7 और अनुसूचित जनजाति समुदाय को 5 सीटें आरक्षित करके बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है।

अपनी रिपोर्ट में विशेष सिफारिश करते हुए परिसीमन आयोग ने राजौरी और पुंछ के क्षेत्रों को अनंतनाग संसदीय सीट के तहत किया है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में कम से कम 2 सदस्य मनोनीत हो, जिनमें से एक कश्मीरी प्रवासी समुदाय की महिला हो। आयोग ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के विस्थापितों को मनोनयन के जरिए विधानसभा में कुछ प्रतिनिधित्व देने पर विचार करने की भी सरकार से सिफारिश की है।

नई सीट डोडा, किश्तवाड़, सांगा, राजौरी, कछुआ और उधमपुर से बनाई गई है। इसके साथ ही डोडा, किश्तवाड़ और सांगा में तीन-तीन सीटें, उधमपुर में चार, राजौरी में 5 और कछुआ की 6 सीटें हो जाएंगी। किश्तवाड़ जिले की एक विधानसभा सीट प्रदेश के नागौरी जिले को मिली है। डोडा जिले की नई सीट डोडा पश्चिम में तथा जसरोटा कटरा में नई सीट है। उधमपुर में रामनगर और सादा में रामगढ़ की सीट आई थी। इसके साथ ही आयोग ने जनता के आक्रोश को देखते हुए जम्मू जिले के सुचेतगढ़ निर्वाचन क्षेत्र को बरकरार रखा है। कुल 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 9 को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रखा गया है। इन 9 क्षेत्रों में 6 जम्मू में और 3 घाटी में है।

पाकिस्तान ने आयोग की इस रिपोर्ट पर आलोचना करते हुए आपत्ति दर्ज कराई है। कश्मीर के राजनीतिक दल भी पाकिस्तान के सुर में सुर मिला कर रिपोर्ट का विरोध कर रहे हैं। जिस तरह पाकिस्तान जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध कर रहा है उसी तरह कश्मीर घाटी के राजनीतिक दल भी 370 का विरोध कर रहा है और परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर जो पाकिस्तान कह रहा है वही बात कमोबेश वहां के राजनीतिक दल भी कह रहे हैं। उनका आरोप है कि जम्मू कश्मीर में हिंदू बहुल क्षेत्रों में सीटे जानबूझकर बढ़ाई गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के प्रभारी राजदूत को तलब करके परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर आपत्ति भी दर्ज करा दी है। पाकिस्तानी सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए दावा किया है कि भारतीय परिसीमन आयोग का उद्देश्य कश्मीर में मुस्लिमों को नागरिकता से वंचित करना और उन्हें कमजोर करना है। उनका आरोप है कि इस कदम के पीछे भारत सरकार की कोई दूसरी योजना छुपी हुई है। क्योंकि विधानसभा क्षेत्रों का निर्धारण इस तरीके से किया गया है ताकि मुस्लिमों की बढ़त को कम किया जा सके। पाकिस्तान का कहना है कि भारत इस प्रयास के जरिए 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के अपने फैसले को वैधानिक आधार देना चाह रहा है।

ज्ञात हो कि परिसीमन आयोग द्वारा आहूत बैठक में नेशनल कांफ्रेंस के नेता भाग ले चुके हैं। अब वे भी समय के साथ अपना रंगढंग बदल रहे हैं। वही आतंकवादियों की हमदर्द नेता की छवि रखने वाली महबूबा मुफ्ती आयोग की सिफारिशों को खारिज करते हुए मानने से इनकार कर रही है। 

गुपकार संगठन से अलग हुए सज्जाद गनी लोन पाकिस्तान की भाषा बोल रहे है, पर परिसीमन आयोग के गठन से लेकर उसकी सिफारिशों तक का ठीकरा फारूख अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला पर फोड़ रहे है। बरहाल भारत सरकार के उच्चाधिकारियों ने पाकिस्तान की ओर से की जा रही ब्यानबाजी को बिना सिर पैर की बात कहते हुए देश के आंतरिक मामलों में दखल देने जैसा माना है। उचित मंच से उन्हें उचित समय पर उत्तर दिये जाने की भी तैयारी की है। जम्मू कश्मीर की आम जनता परिसीमन के बाद शीघ्र चुनाव को लेकर उत्साहित है।  

Share This