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गतिशक्तिः प्रौद्योगिकी शक्ति परियोजनाओं को गति

Admin November 22, 2021

केंद्र सरकार के 16 मंत्रालयों के अतिरिक्त राज्य सरकारों की भी विभिन्न योजनाओं जैसे सागरमाला, भारत माला, अंतर्देशीय जलमार्गों, ड्राईलैंड बंदरगाहों, उड़ान इत्यादि सभी को जोड़ते हुए कार्गा और यात्री यातायात में तेजी लाने का काम गतिशक्ति योजना करेगी। — डॉ. अश्वनी महाजन

 

हम अक्सर अपने आसपास देखते और सुनते हैं कि हमारे मोहल्ले में सड़क बनी और उसके थोड़े ही दिन बाद बिजली, जल, टेलीफोन या किसी अन्य विभाग का रोड कटिंग का काम शुरू हो गया और अच्छी भली नई सड़क का सत्यानाष हो गया। यह भी देखा जाता है कि किसी मुख्य मार्ग पर पुल निर्माण होना है, लेकिन उसमें बाधा यह आ जाती है कि उस सड़क के नीचे टेलीफोन, बिजली की लाइनें भी बिछी है और कई बार जल की पाइपें भी वहां है। ऐसे में उन सब विभागों के साथ तालमेल होना जरूरी है। उन सभी विभागों के अफसरों के साथ तालमेल में देरी उस पुल अथवा किसी भी अन्य निर्माण की प्रक्रिया में देरी कर देती है। इसमें में कई बार तो सालों लग जाते हैं। ऐसे में निर्माण विभाग ने पुल बनाने के लिए जो बजट रखा होता है, उससे कहीं ज्यादा उसकी लागत बढ़ जाती है। इस कारण जब तक नए बजट में उस परियोजना के लिए राषि नहीं जुटाई जाती, वह योजना आगे खिसकती जाती है। परियोजना में देरी से न केवल लागत में वृद्धि होती है, जनता को भी खासी मुसीबतों से निपटना पड़ता है। शहरों में आधी बनी सड़कों, पुलों, फ्लाईओवर के रूप में हम अक्सर इसे देखते हैं।

इन सब मुसीबतों की जड़ विभागों में तालमेल की कमी है। विचारवान लोग अक्सर यह सोचते थे कि क्या विभिन्न विभाग इस हेतु तालमेल नहीं बिठा सकते, लेकिन ऐसा होता नहीं था। लेकिन अब इस मुसीबत से निजात मिलता सम्भव दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुधार, ‘गतिषक्ति योजना’ के माध्यम से ऐसा होना संभव है। वास्तव में यह एक स्वपन ही माना जा रहा था कि क्या सभी विभाग आपस में तालमेल बिठाते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को कार्य रूप दें ताकि विभागों के बीच तालमेल के अभाव के कारण होने वाली देरी को टाला जा सके और साथ ही साथ लागत भी घटे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहुस्तरीय संपर्क प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री गतिषक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को मंजूरी दी है , जिसमें कार्यान्वयन, निगरानी और समर्थन तंत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर को ‘लॉजिस्टिक’ लागत को कम करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की थी।

वस्तुओं और व्यक्तियों की आवाजाही में कुषलता और तेजी

कार्गा यानी वस्तुओं की आवाजाही की अधिक लागत हमारे देष में कार्यकुषलता और प्रतिस्पर्धा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। लेकिन वर्तमान अवस्था में उस लागत को कम करना संभव प्रतीत नहीं होता था लेकिन प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए यदि कार्गा को गतिषील किया जा सके तो लागत तो घटेगी ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी लाभ हो सकता है। उसके लिए यातायात के विभिन्न माध्यमों की समन्वित योजना लाभकारी हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस स्वप्निल योजना गतिषक्ति में 16 मंत्रालय को शामिल किया गया है जो इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए आपस में तालमेल बिठा सकेंगे। इस योजना का मतलब केवल यही नहीं है। वास्तव में जीवन को सुख में बनाने भारतीय उद्योगों कृषि और व्यवसाय को प्रतिस्पर्धीबनाने और लागतों को घटाकर संसाधनों का अधिकाधिक कुषलता पूर्वक उपयोग की योजना का नाम ही गतिषक्ति योजना है। इस योजना के तीन हिस्से है योजना के लिए संस्थागत खाका तैयार करना; कार्य निष्पादन संकेतकों की रचना और निगरानी कार्यक्रम और देषवासियों के लिए की सुविधा के उद्देष्य से हित धारकों के साथ विमर्ष।

यह बात सही है कि देष में इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की कमी है। सरकार द्वारा अगले 5 सालों में 100 लाख करोड़ रू. की इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का निर्माण किया जाना है। इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब ही है लोगों के जीवन को सुखमय बनाना है या यूं कहे की ‘एज ऑफ लिविंग’। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं ऐसी बननी चाहिए जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा शक्ति बड़े और वे विश्व के अन्य देषों के साथ भली भांति जूझसकें। यह भी जरूरी है कि जब कोई परियोजना बने तो लोग उसका अधिकाधिक लाभ उठा सके। उदाहरण के लिए यदि हम मेट्रो रेल बनाएं और उसकी पहुंच रिहायषी इलाकों तक न बन पाए तो उसका क्या लाभ?

प्रौद्योगिकी की शक्ति के साथ परियोजनाओं को गति

गति शक्ति योजना का एक पहलू तो विभागों के बीच आपसी तालमेल तो है ही लेकिन इसका असली मकसद नई प्रौद्योगिकी का उपयोग है। हम जानते हैं कि आज ‘जीपीएस’ यानी ग्लोबल पोजिषनिंग सिस्टम से ग्लोबल स्पेषियल मेपिंग संभव है उसका भली-भांति विष्लेषण करते हुए विभिन्न विभाग तालमेल बिठा कर इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति दे सकते हैं। यानी नई प्रौद्योगिकी शक्ति के साथ प्रोजेक्ट्स को गति। शायद इसीलिए इस योजना को ‘गतिषक्ति’ का नाम दिया गया है।

गतिषक्ति एक पोर्टल बनाया गया है जो ऐसा उपकरण होगा जिसमें बहु शैली यानि ‘मल्टी मोडल’ यातायात प्रणाली को अंजाम दिया जा सकेगा। इससे संभव हो पाएगा कि भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर भी बने। सड़क रेल की पटरी और गैस पाइपों के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल भी बिछाई जाए। हमने देखा है कि ऑप्टिकल फाइबर के लिए रोड कटिंग तो जैसे अनिवार्य ही था। लेकिन गति शक्ति परियोजना से अब ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की लागत कहीं कम हो सकती है क्योंकि अब यह सड़क रेल और पाइपलाइन बनाते हुए साथ ही साथ बिछाई जा सकती है। कल्पना करें कि इससे ग्रामीण इलाकों सहित दूरदराज के क्षेत्रों तक डिजिटल क्रांति लाई जा सकती है।

रेलवे ने गतिषक्ति योजना के तहत 500 प्रकार के समन्वित यातायात केंद्रों की अगले 4-5 वर्षों में स्थापना करने का लक्ष्य रखा है। जिसमें रेलवे को यातायात के अन्य साधनों के साथ जोड़ा गया है। इससे व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही की कुषलता में वृद्धि और लागत में कमी होगी। इसी प्रकार जल मार्ग से यातायात को भी बढ़ावा देने की योजना है और गंगा सहित अन्य जलमार्गों को बंदरगाहों से जोड़ने हेतु भी योजना बनाई जा रही है। आज देष में 13 देषीय कार्यरत जल मार्ग है। जहाजों पर सामान उतारने और चढ़ाने में भी कमी लाई गई है। 2014 में यह समय 41 घंटे का था जो अब घट कर 27 घंटे ही रह गया है।

योजना का क्रियान्वयन

गतिषक्ति योजना की मुख्य विषेषता जीआईएस यानी जियोग्राफिक इनफार्मेषन सिस्टम प्लेटफार्म है। इस संबंध में भास्कराचार्य नेषनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेषन एंड जिओ इनफोरमैट्रिक्स को इसका ज़िम्मा दिया गया है। केंद्र सरकार के 16 मंत्रालयों के अतिरिक्त राज्य सरकारों की भी विभिन्न योजनाओं जैसे सागरमाला, भारत माला, अंतर्देषीय जलमार्गों, ड्राईलैंड बंदरगाहों, उड़ान इत्यादि सभी को जोड़ते हुए कार्गा और यात्री यातायात में तेजी लाने का काम यह गतिषक्ति योजना करेगी।

गतिषक्ति योजना के तहत कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में 18 मंत्रालयों के सचिवों को सदस्य के रूप में शामिल करके सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस) का गठन भी किया जाएगा।विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के नेटवर्क योजना प्रभाग के प्रमुखों को शामिल कर एक बहुस्तरीय नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) का गठन किया जाएगा। एनपीजी को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के लॉजिस्टिक प्रभाग में स्थित एक तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) से मदद मिलेगी।टीएसयू में विभिन्न बुनियादी ढांचा क्षेत्रों, जैसे विमानन, सामुद्रिक, सार्वजनिक परिवहन, रेल, सड़क और राजमार्ग, बंदरगाह, बिजली, पाइपलाइन, जीआईएस, आईसीटी, वित्त/बाजार पीपीपी, लॉजिस्टिक, डेटा विष्लेषण जैसे क्षेत्रों के विषेषज्ञ होंगे। 18 विभागों के सचिवों का यह अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस) पीएम गतिषक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी करेगा।    

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