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ग्रामीण पर्यटन से अर्थव्यवस्था को गति

Admin August 18, 2021

महात्मा गाँधी कहते हैं कि, “हम एक ग्रामीण सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं। हमारे देश की विशालता, जनसंख्या का विस्तार, देश की अवस्थिति और जलवायु, मेरे विचार में ये सभी इसे एक ग्रामीण सभ्यता बनाते हैं।” इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारत को मजबूती प्रदान करने के लिए जो भी तत्व हमे चाहिए वो सभी तत्व ग्रामीण भारत में विद्यमान है। — डॉ अवनीन्द्र कुमार

 

कोविड-19 की विभीषिका ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत तो अब भी गांवों में ही बसता है। कोरोना महामारी से लाखों-करोड़ों पलायित जनों की रक्षा गांवों ने ही कि है। हजारों वर्षों से हमारे गांव आत्मनिर्भरता के केंद्र रहे हैं, अब जब भारत की आर्थिक स्तिथि मंदी के दौर से गुजर रही है तो इसको मजबूत बनाने का आधार गांव ही बनेंगे और इसमे ’ग्रामीण पर्यटन’ की प्रमुख भूमिका रहेगी। गाँवां द्वारा उत्पन्न स्वदेशी उत्पादों जिसमे खाद्य और अखाद्य सभी तरह के उत्पाद शामिल हैं पर्यटकों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुँचेगे और लाखों लोगों की आजीविका को पुष्ट करने का कार्य करेंगे।

भारत सरकार ने ग्रामीण पर्यटन की परिभाषा में स्पष्ट किया है कि कोई भी ऐसा पर्यटन, जो ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और ग्रामीण स्थलों की धरोहर को दर्शाता हो, जिससे स्थानीय समुदाय को आर्थिक और सामाजिक लाभ पहुँचता हो, साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच संवाद से पर्यटन अनुभव के अधिक समृद्ध बनने की सम्भावना हो, तो उसे ‘ग्रामीण पर्यटन’ कहा जा सकता है।

इस प्रकार इस परिभाषा की पूर्ति भारत के प्रत्येक जिले का एक न एक गांव अवश्य करता है वो अपने अंदर कला, संस्कृति, इतिहास को समेटे हुए रहता है बस जरूरत केवल है तो हमे उन गाँवो के छिपे हुए महत्व को सबके सामने रखना।इस कारण वो गांव आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा और ग्रामीण स्तर पर ही कई रोजगारपरक कार्यो का सृजन होगा और पूंजी का निवेश बढ़ेगा। पूंजी के आने से सड़क बिजली जैसी विकास के कार्य गाँवो तक पहुँचेगे जिससे सम्भावनाओं का द्वार सभी के लिए खुल जायेगा।

ग्रामीण पर्यटन के विभिन्न आयाम हैं ये कृषि पर्यटन,सांस्कृतिक पर्यटन,प्राकृतिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और पारिस्थिकीय पर्यटन आदि हैं इन सभी प्रकारो को हम ग्रामीण विकास के एक प्रमुख नियामक कह सकते हैं।भारत जैसे देश के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है क्योंकि भारत की 68.84 प्रतिशत जनसंख्या इसके 6,38,000 गाँवों में निवास करती है।

भारत के लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से गाँवो से जुड़े हुए हैं।वर्ष में एक-दो बार उनका गाँवो में प्रमुख तीज-त्योहारों पर आना-जाना लगा रहता है , तो यह प्रश्न उठता है कि- क्यों कोई भारतीय किसी अन्य गांव में घूमने जाने के लिए पैसा खर्च करे? जबकि उसका सम्बन्ध किसी प्रकार से गांव से है, तो इसका स्पस्ट उत्तर है कि देश में ऐसे कई ग्रामीण पर्यटन स्थल है जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के हैं जो सामान्य गाँवो से भिन्न हैं है और वहाँ जाकर उन्हें सार्थक अनुभव प्राप्त होगा। उदाहरणस्वरूप गुजरात के कच्छ इलाके के रण क्षेत्र में कई गांव हैं जो कच्छी संस्कृति को अपने मे समाये हुए हैं ’रणोत्सव’ माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय कपड़ों की कारीगरी, नमक के खेत और भी कई तरह के अनुभव प्राप्त होते हैं। असम के माजुली द्वीप परिस्थितिकीय पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है जनजाति जीवनशैली, ब्रह्मपुत्र नदी के जलीय जीवन, कला-संस्कृति के अनुपम ज्ञान का भंडार है। हिमाचल और उत्तराखंड के कई गांव साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दे रहें हैं ग्रामवासी अपने सेब के बागानों की यात्राएं पर्यटकों को करवाते हैं, नदी-झरनों के आसपास टेंट लगा कर प्रकृति के समीप रहने का अनुभव करवा रहें हैं इस प्रकार से स्थानीय लोगो को सुगमता से रोजगार प्राप्त हो रहा है। पर्यटकों की आवाजाही से मार्गो की उचित देखरेख हो रही है। स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों में भेजने के लिए सुगमता प्राप्त हो रही है ये सभी क्षेत्र पहाड़ी खाद्य सामग्रियों के लिए प्रसिद्ध है जिनकी देश-विदेश में बहुतायत में मांग है जिनमे उत्तराखंड का राजमा, मंडुवा, झंगोरा, काले भट, गहथ, तिल आदि अपनी मार्केट बना रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पूर्वांचल के गाजीपुर जिले में अफीम का कारखाना जो पूरे भारत में एकमात्र है उसके आसपास के गांव अफीम की खेती करते हैं। इससे दवाईयों के लिए कच्चे पदार्थो का निर्माण होता है अपने आप मे इस तरह की खेती अनोखी है जो भारत मे कहीं और नही देखने को मिलेगी इस तरह से ये क्षेत्र ’कृषि पर्यटन’ हेतु उपयोगी स्थान है जहां पर्यटकों को अफीम की कृषि से लेकर दवा निर्माण कैसे होता है तक का अनुभव प्राप्त होगा। गाजीपुर के ही सैदपुर (भीतरी) गांव में स्कंदगुप्त का अभिलेख स्थापित है जिसमें गुप्त काल के यशस्वी गाथायें है, एवं मुहम्दाबाद में 1942 में तिरंगा फहराने पर अंग्रेजो के गोली के शिकार 7 शहीदों का बलिदान स्थल भी है। इन पर्यटक स्थलों के भ्रमण से पर्यटकों को अपने गौरवशाली इतिहास का ज्ञान और उसपे गर्व करने का गौरव प्राप्त होगा।

मिर्जापुर जिले में चुनारगढ का किला एवं उसके आसपास बसे गाँवो में चीनी मिट्टी के बर्तनों, बलुआ पत्थर की कारीगरी के लिए ये क्षेत्र प्रसिद्ध है। भदोही जिले के गोपीगंज, औराई ब्लॉक के कई गांव ’भदोही कालीन’ निर्माण के लिए प्रसिद्ध है इस तरह के गाँवो को अगर पर्यटन स्थल में बदल दिया जाता है तो सीधे कारीगरों से कालीनों की खरीदारी पर्यटक कर सकते हैं इससे उनको बाजार तक नही जाना पड़ेगा जिससे समय और पूंजी दोनों की बचत होगी। गोरखपुर जिले के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलहरिया, भरवलिया, अमवां, बुढ्ढाडीह, एकला, बेलवा रायपुर और चरगांवां जैसे गाँव टेराकोटा मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है कुल 1000 प्रकार की मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण हाथों के माध्यम से किया जाता है एवं देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस तरह के पर्यटन स्थलो पर पर्यटक हस्तकला देखने मृण्मूर्तियों के निर्माण को देखने जा सकते हैं। इस तरह से सरकारें भी पर्यटकों के बढ़ती रुचि को देखते हुए गाँवां की ओर ध्यान देगी और मूलभूत सेवाएं जिससे अभीतक गांव अछूते रहे थे उनको उपलब्ध करवाने का कार्य करेगी जिससे गाँवो के सामाजिक से लेकर आर्थिक व्यवस्था का भी उद्धार होगा।

ग्रामीण पर्यटन के बढ़ने से सबसे महत्त्वपूर्ण प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ग्रामीण भारत में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से लोगों के बीच व्यापार का स्तर बढ़ेगा जिससे उनकी आय का स्तर भी बढ़ेगा। इससे गांव के युवाओं, महिलाओं एवं अन्य के लिये रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यटन के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय कारीगरों से तैयार उत्पाद सीधे खरीदने का लाभ प्राप्त होता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पर्यटकों के साथ विचारों के आदान-प्रदान से ग्रामीण लोगों में नये विचार सृजित होंगे। इससे शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक जीवनोपयोगी संसाधनों आदि के प्रति ग्रामीणों की रुचि बढ़ेगी। इससे शिक्षा का महत्व भी बढ़ेगा और लोग नई चीज सीखने हेतु शिक्षा के महत्व को भी समझेंगे। ग्रामीण भारत की जड़ीबूटियों, औषधीय गुणों से पूर्ण वनस्पतियों एवं दुर्लभ जीव-जंतु विद्यार्थियों के लिए सीखने का अच्छा स्त्रोत हो सकती है जिससे युवा प्रकृति के महत्व को समझेंगे।

भारत मे ग्रामीण पर्यटन को कैसे सजाया और सँवारा जाए उस पर हमे भूटान सरकार की नीति का अनुसरण करना चाहिए वहाँ की सरकार भूटान में 90 गांवो को ’मॉडलगांव’ के रूप में विकसित कर पर्यटन को बढ़ाने का कार्य कर रही है ये मॉडल गांव आधुनिक लॉजिस्टिक सेवाओ से युक्त हैं गांव में रहकर भी आप बाहरी दुनिया से जुड़े रहेंगे इस मूल मंत्र ने भूटान में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का कार्य किया है। इसको हमारे देश को अमल में लाना होगा तभी देशी से लेकर विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी जिसकी अपार संभावनायें भारत के प्रत्येक ग्रामीण इलाकों में है।

महात्मा गाँधी कहते हैं कि, “हम एक ग्रामीण सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं। हमारे देश की विशालता, जनसंख्या का विस्तार, देश की अवस्थिति और जलवायु, मेरे विचार में ये सभी इसे एक ग्रामीण सभ्यता बनाते हैं।” इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारत को मजबूती प्रदान करने के लिए जो भी तत्व हमे चाहिए वो सभी तत्व ग्रामीण भारत में विद्यमान है। हमे और सरकारों को इन क्षेत्रों की पहचान वहां पर्यटन की सम्भावनाओं की तलाश करनी चाहिए। देश मे ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये सब करके ही हम देश मे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ा सकते हैं और साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

 

डॉ अवनीन्द्र कुमारः प्रचार प्रमुख काशी प्रांत, पूर्वी उप्र, स्वदेशी जागरण मंच

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