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Resolution-2-H (15th Rashtriya Sabha, Gwalior (MP))

Admin January 19, 2022

प्रौद्योगिकी हाँ, क्रिप्टो ना

हाल  ही में, सरकार ने ’क्रिप्टो मुद्रा और राजकीय डिजिटल मुद्रा विधेयक 2021’ की शुरूआत की घोषणा की है। यह स्पष्ट है कि सरकार निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का इरादा रखती है और भारतीय रिजर्व बैंक की डिजिटल मुद्रा जारी करने की योजना है। हालाँकि, सरकार ने इन क्रिप्टोकरेंसी के तहत प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ छूट देने का भी संकेत दिया है।

हालांकि, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक क्रिप्टो में व्यापार को प्रतिबंधित करने के पक्ष में रहे हैं, लेकिन, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि चूंकि सरकार ने कानूनी रूप से क्रिप्टोक्यूरैंसीज पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, रिज़र्व बैंक का बैंकों को  क्रिप्टो हेतु मना करने संबंधी निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही क्रिप्टो एक्सचेंजों ने बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी का कारोबार शुरू कर दिया है। हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन अनुमान है कि लगभग 20 मिलियन लोगों ने अपना पैसा क्रिप्टोकरेंसी में लगाया हुआ है। छोटे और बड़े शहरों, और यहां तक कि गांवों के लोग (ज्यादातर युवा) इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इसमें अपना पैसा लगाकर जल्दी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।  

स्वदेशी जागरण मंच का दृढ़ विश्वास है कि -

1.    क्रिप्टो को करैंसी कहना ही गलत है। करैंसी का अभिप्राय है सरकार की गारंटीशुदा, केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी मुद्रा। क्रिप्टो करंसी निजीतौर पर जारी आभासी सिक्के हैं, जिनकी कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।

2.    क्रिप्टो का उपयोग अपराधियों, आतंकवादियों, स्मगलरों, हवाला में संलग्न व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में पूरी दुनिया में एक कम्प्यूटर वायरस के माध्यम से जब साइबर अपराधियों ने कई कंपनियों का डाटा उड़ा दिया और उसे वापिस देने के लिए फिरौती बिटकॉयन में मांगी गई, तो बिटकॉयन के आपराधिक इस्तेमाल के बारे में दुनिया की जानकारी बढ़ी।

3.    चूंकि यह एक ऐसी मूल्यवान आभासी संपत्ति है, जिसके धारक को तो उसका पता होता है, लेकिन किसी भी अन्य को इसका पता तभी चलता है, जब इसमें बैंक के माध्यम से लेनदेन होता है। हालांकि इसके लेनदेन को घोषित करने के बाद इस पर आयकर लगाया जा सकता है, लेकिन यदि इसकी बिक्री देश में न कर, विदेश में की जाए तो उस पर कर नहीं लगेगा। वास्तव में क्रिप्टो एक वैधानिक संपत्ति नहीं है, इसे किसी कंपनी या व्यक्ति की बैलेंसशीट में नहीं दिखाया जा सकता। यानि क्रिप्टो आयकर, जीएसटी एवं अन्य कई प्रकार के करो की चोरी का माध्यम बन रही है। एक और समस्या यह है कि नियमों को दरकिनार कर देश से पूंजी स्थानांतरित करने का यह सबसे सुविधाजनक तरीका है।

4.    बिटकॉयन तथा अन्य प्रकार की क्रिप्टो करैंसियों की कीमत में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और उनकी लगातार बढ़ती मांग के कारण बढ़ती कीमत के कारण युवा इसकी तरफ आकर्षित हो रहा है। बड़ी मात्रा में देश का धन इसमें लगाया जा रहा है। यह एक अंधे कुएं की तरह है, क्योंकि ये पैसा कहां जा रहा है, किसकी जेब में जा रहा है, किसी को कुछ मालूम नहीं। कल्पना करें कि यदि यह पैसा यदि देश के विकास में लगे, हमारे युवा उद्योग धंधे में लगाएं तो हमारी जीडीपी में खासा फायदा हो सकता है। कहा जा रहा है कि पिछले कुछ समय से देश में पूंजी निर्माण कम हो रहा है। यदि इस प्रकार की आभासी तथाकथित संपत्ति में पैसा लगाने की प्रवृत्ति बढ़ी तो यह निवेश और अधिक कम हो सकता है।

5.    क्रिप्टो के खिलाफ एक बड़ा तर्क यह है कि इसकी मायनिंग में बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है, जिससे बिजली की कमी झेलनी पड़ सकती है। चीन द्वारा क्रिप्टो को प्रतिबंधित करने में यह सबसे बड़ा तर्क दिया गया है।

स्वदेशी जागरण मंच की यह राष्ट्रीय सभा मांग करती है किः

1.    सरकार भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा क्रिप्टो मुद्राओं की खरीद, बिक्री, निवेश और अन्यथा लेनदेन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाये।  इस मांग के पक्ष में तर्क हैंः 
क)    क्रिप्टो में कोई अंतर्निहित परिसंपत्ति नहीं है।  
ख)    जारीकर्ता पहचान योग्य नहीं है।  
ग)    क्रिप्टो मुद्रा की मान्यता से भारी अटकलें लग सकती हैं जो वित्तीय बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं और
ड)    मान्यता के परिणामस्वरूप इसके द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक का वित्तपोषण भी हो सकता है।
ण)    इसका परिणाम पिछले दरवाजे से पूंजी खाता परिवर्तनीयता में होगा।

2.    बिटकॉइन, एथेरियम आदि जैसी क्रिप्टोकरेंसी को ‘एसेट’ या ’डिजिटल एसेट’ के रूप में भी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह परोक्ष रूप से मुद्रा की तरह एक्सचेंज का माध्यम बन जाएगा।  यह इस कारण से है कि भूमि, सोना और शेयरों जैसी अन्य संपत्तियों के विपरीत, ’क्रिप्टो-परिसंपत्तियों’ में विभाज्यता और सुवाह्यता की विशेषताएं होती हैं और विनिमय का एक स्वीकृत माध्यम बनने की संभावना होती है, और इस प्रकार एक क्रिप्टो-मुद्रा होने की ओर बढ़ती है।  

3.    क्रिप्टो मुद्रा रखने वाले व्यक्तियों को आयकर विभाग को सूचना प्रस्तुत करने के प्रावधान के अधीन थोड़े समय के भीतर इसे बेचने या विनिमय करने की अनुमति दी जा सकती है।  

4.    सरकार वर्तमान में प्रचलन में क्रिप्टो-मुद्राओं या क्रिप्टो-परिसंपत्तियों की खरीद, बिक्री या अन्यथा लेनदेन के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाये। 

5.    प्रतिबंध की अवहेलना करने पर व्यक्ति/संस्था को वित्तीय दंड का प्रावधान हो।  

6.    ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी को केवल क्रिप्टो करेंसी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, बल्कि आर्थिक या सामाजिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।  

7.    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के साथ-साथ कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को क्रिप्टो मुद्राओं पर प्रतिबंध के संबंध में आक्रामक उपभोक्ता जागरूकता अभियान चलाना चाहिए और सलाह दी जानी चाहिए कि तथाकथित क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंजों द्वारा प्रसारित किए जा रहे भ्रामक विज्ञापनों का शिकार न हों, विशेष रूप से टियर 2 और टियर 3 के छोटे शहरों में। 

8.    भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) जारी करने से संबंधित कानून जल्दी से तैयार किया जाए।  

9.    सीबीडीसी को कानूनी निविदा के रूप में मान्यता हो।

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