कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास कई तकनीकी क्षेत्रों के संयोजन से संभव हुआ है। इनमें मशीन लर्निंग, बड़े भाषा मॉडल, रोबोटिक्स और कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता प्रमुख हैं। - डॉ. धनपतराम अग्रवाल
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ बन चुकी है। जिस प्रकार औद्योगिक क्रांति ने मशीनों के माध्यम से उत्पादन प्रणाली को बदल दिया था, उसी प्रकार आज एआई ज्ञान, निर्णय और नवाचार की प्रकृति को बदल रही है। डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और स्वचालित निर्णय प्रणालियाँ आज उद्योग, व्यापार और शासन के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोग की जा रही हैं।
एआई तकनीक का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा, सैन्य रणनीति, शिक्षा प्रणाली और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर रही है। इसी कारण विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ-विशेष रूप से अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ-एआई को अपनी राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना चुकी हैं।
पीडब्ल्यूसी और मैकिन्से जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुसार आने वाले वर्षों में एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था में ट्रिलियन डॉलर स्तर का योगदान कर सकती है। इससे स्पष्ट है कि एआई भविष्य की आर्थिक संरचना को पुनः परिभाषित करने की क्षमता रखती है।
भारत के संदर्भ में भी यह तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के पास विशाल जनसंख्या, डेटा विविधता, तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे संसाधन हैं। यदि इन संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो भारत एआई आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ऐतिहासिक विकास
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अवधारणा बीसवीं सदी के मध्य में विकसित हुई। 1950 में ब्रिटिश गणितज्ञ एलन ट्यूरिंग ने यह प्रश्न उठाया कि क्या मशीनें सोच सकती हैं। उन्होंने “ट्यूरिंग टेस्ट” का प्रस्ताव दिया, जिसके माध्यम से यह निर्धारित किया जा सकता था कि कोई मशीन मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित कर सकती है या नहीं।
1956 में अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज में आयोजित सम्मेलन में पहली बार ‘‘आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस” शब्द का औपचारिक प्रयोग किया गया। इस सम्मेलन को एआई अनुसंधान की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
प्रारंभिक दशकों में एआई अनुसंधान मुख्यतः नियम आधारित प्रणालियों पर आधारित था। इन प्रणालियों में मशीनों को विशिष्ट नियमों के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रोग्राम किया जाता था। हालांकि इस पद्धति की सीमाएँ जल्द ही स्पष्ट हो गईं, क्योंकि जटिल समस्याओं को केवल स्थिर नियमों के माध्यम से हल करना कठिन था।
बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में मशीन लर्निंग का विकास हुआ। इस तकनीक ने मशीनों को डेटा से सीखने और अनुभव के आधार पर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग और जीपीयू आधारित कंप्यूटिंग शक्ति के विकास ने डीप लर्निंग और बड़े भाषा मॉडलों के विकास को संभव बनाया।
आज जेनेटिव एआई और एजीआई जैसी अवधारणाएँ एआई अनुसंधान के नए आयाम प्रस्तुत कर रही हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तकनीकी आयाम
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास कई तकनीकी क्षेत्रों के संयोजन से संभव हुआ है। इनमें मशीन लर्निंग, बड़े भाषा मॉडल, रोबोटिक्स और कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता प्रमुख हैं।
मशीन लर्निंग एआई का मूल आधार है। इसमें कंप्यूटर एल्गोरिद्म डेटा से पैटर्न सीखते हैं और उसी आधार पर भविष्यवाणियाँ या निर्णय लेते हैं। मशीन लर्निंग के विभिन्न प्रकार हैं जिनमें सुपरवाइज्ड लर्निंग, अनसुपरवाइज्ड लर्निंग और रिइन्फोर्समेंट लर्निंग प्रमुख हैं।
बड़े भाषा मॉडल आधुनिक एआई की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति माने जाते हैं। ये मॉडल विशाल मात्रा में पाठ डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं और मानव भाषा को समझने तथा उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। आज एलएलएम आधारित प्रणालियाँ शिक्षा, शोध, कोडिंग और डिजिटल सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
रोबोटिक्स एआई का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम है। एआई संचालित रोबोट औद्योगिक उत्पादन, चिकित्सा सर्जरी, अंतरिक्ष अनुसंधान और सैन्य प्रणालियों में उपयोग किए जा रहे हैं। भविष्य में रोबोटिक्स मानव श्रम की प्रकृति को भी बदल सकता है।
एजीआई या कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता एआई अनुसंधान का सबसे उन्नत और संभावित रूप है। एजीआई का लक्ष्य ऐसी मशीनों का विकास करना है जो मानव के समान सामान्य बुद्धिमत्ता प्रदर्शित कर सकें।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्योग की संरचना, आठ परतें और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल एक सॉफ्टवेयर तकनीक के रूप में समझना पर्याप्त नहीं है। वास्तव में यह एक व्यापक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र है जिसमें खनिज संसाधनों से लेकर अंतिम उपयोगकर्ता तक अनेक स्तर शामिल होते हैं। इस पूरे तंत्र को समझने के लिए कई विशेषज्ञ एआई उद्योग को आठ प्रमुख परतों (एआई इकोसिस्टम लेयर्स) में विभाजित करते हैं।
इन परतों का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि एआई का विकास केवल एल्गोरिद्म या सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खनन उद्योग, सेमीकंडक्टर निर्माण, क्लाउड अवसंरचना, डेटा केंद्र और डिजिटल सेवाओं तक फैला हुआ है।
पहली परत : खनिज संसाधन और कच्चा माल
एआई उद्योग की आधारभूत परत खनिज संसाधनों से जुड़ी है। सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए कई महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता होती है, जिनमें सिलिकॉन, गैलियम, जर्मेनियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व प्रमुख हैं। इन खनिजों का खनन और प्रसंस्करण वैश्विक आपूर्ति श्रंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विश्व में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के उत्पादन में चीन का प्रमुख स्थान है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और चिली जैसे देश भी महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के लिए जाने जाते हैं। इन संसाधनों की उपलब्धता एआई उद्योग के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दूसरी परत : सेमीकंडक्टर निर्माण
एआई उद्योग की दूसरी महत्वपूर्ण परत सेमीकंडक्टर निर्माण से संबंधित है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है, जिसके लिए विशेष प्रकार के चिप्स का उपयोग किया जाता है। इनमें जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिटस), एआई एक्सिलेरटर्स और टीपीयू (टेंसर प्रोसेसिंग यूनिटस) प्रमुख हैं।
आज वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में कुछ कंपनियाँ अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाती हैं। एनवीडिया एआई चिप डिजाइन में अग्रणी है, जबकि इंटेल और एएमडी भी उच्च प्रदर्शन वाले प्रोसेसर विकसित करते हैं। ताइवान की कंपनी टीएसएमसी विश्व की सबसे बड़ी चिप निर्माण कंपनी है और कई वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ अपने चिप उत्पादन के लिए उसी पर निर्भर हैं।
दक्षिण कोरिया की सेमसंग भी उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रकार सेमीकंडक्टर उद्योग एआई पारिस्थितिकी तंत्र की केंद्रीय धुरी बन चुका है।
तीसरी परत : कंप्यूटिंग अवसंरचना
एआई मॉडल प्रशिक्षण के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। बड़े एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए हजारों जीपीयू और सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। आज कई वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ एआई कंप्यूटिंग अवसंरचना विकसित कर रही हैं। एनवीडिया के जीपीयू क्लस्टर, गूगल के टीपीयू और माइक्रोसॉफ्ट के एआई सुपरकंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म इस क्षेत्र के प्रमुख उदाहरण हैं। इस कंप्यूटिंग अवसंरचना के बिना बड़े एआई मॉडल का विकास संभव नहीं है।
चौथी परत : क्लाउड प्लेटफॉर्म और डेटा सेंटर
एआई उद्योग की चौथी परत क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर से संबंधित है। क्लाउड प्लेटफॉर्म एआई मॉडल प्रशिक्षण और संचालन के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराते हैं।
आज विश्व में अमजोन वेब सेवाएं (एडब्ल्यूएस), माइक्रोसॉफ्ट एज्योर, और गूगल क्लाउड सबसे बड़े क्लाउड प्लेटफॉर्म हैं। ये कंपनियाँ विशाल डेटा सेंटर नेटवर्क के माध्यम से एआई आधारित सेवाएँ प्रदान करती हैं।
भारत में भी डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। रिलायंस जियो, अदानीकनेक्स और योट्टा इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियाँ बड़े डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं।
पाँचवीं परत : आधारभूत एआई मॉडल
एआई पारिस्थितिकी तंत्र की पाँचवीं परत आधारभूत एआई मॉडलों से संबंधित है। इन मॉडलों को अक्सर ‘‘फाउंडेशन मॉडल’’ कहा जाता है।
ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड, एंथ्रोपिक और मेटा जैसी कंपनियाँ बड़े एआई मॉडल विकसित कर रही हैं। ये मॉडल विशाल डेटा सेट पर प्रशिक्षित होते हैं और कई प्रकार के अनुप्रयोगों के लिए आधार प्रदान करते हैं। जेनेरेटिव एआई मॉडल जैसे जीपीटी और क्लाउड इसी श्रेणी में आते हैं।
छठी परत : एआई प्लेटफॉर्म और डेवलपर टूल
एआई उद्योग की अगली परत डेवलपर प्लेटफॉर्म और टूल से जुड़ी है। ये प्लेटफॉर्म डेवलपर्स को एआई आधारित अनुप्रयोग बनाने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और हग्गिंग फेस जैसे प्लेटफॉर्म एआई डेवलपमेंट के लिए व्यापक टूल प्रदान करते हैं। इन टूल्स के माध्यम से कंपनियाँ और स्टार्टअप एआई आधारित उत्पाद विकसित कर सकते हैं।
सातवीं परत : उद्योग आधारित एआई समाधान
एआई उद्योग की सातवीं परत उद्योग आधारित अनुप्रयोगों से संबंधित है। इस स्तर पर एआई तकनीक को विभिन्न उद्योगों में लागू किया जाता है। एसएपी, सेल्सफोरस और पलान्टिर जैसी कंपनियाँ विभिन्न उद्योगों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करती हैं। भारत में टीसीएस, इंफोसिस, विपरो और एचसीएल जैसी आईटी कंपनियाँ भी एआई आधारित सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
आठवीं परत : अंतिम उपयोगकर्ता
एआई पारिस्थितिकी तंत्र की अंतिम परत अंतिम उपयोगकर्ता से संबंधित है। इस स्तर पर एआई तकनीक उपभोक्ता उत्पादों और सेवाओं के रूप में दिखाई देती है। स्मार्टफोन, डिजिटल सहायक, स्वचालित वाहन, स्मार्ट शहर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एआई के व्यापक उपयोग के उदाहरण हैं।
(क्रमशः)