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राष्ट्रीय परिषद बैठक  - 7, 8 मार्च 2026 (जयपुर, राजस्थान)

राष्ट्रीय परिषद बैठक 

7, 8 मार्च 2026 - जयपुर (राजस्थान)


प्रथम सत्र (उद्घाटन सत्र)

दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद बैठक का शुभारंभ भारत माता, दीनदयाल उपाध्याय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह व वर्तमान में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मा. वी. भाग्गैया जी, अ.भा. संयोजक श्री आर. सुंदरम जी, अ.भा. संगठक श्री कश्मीरी लाल जी, अ.भा. सहसंयोजक डॉ भगवती प्रकाश शर्मा जी, डॉ अश्वनी महाजन जी, डॉ धनपत राम अग्रवाल जी, डॉ राजकुमार मित्तल जी, अ.भा. सह संगठक श्री सतीश कुमार जी एवं श्रीमती अर्चना मीना जी (अ.भा. महिला प्रमुख) उपस्थित रहें।

दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत अधिकारियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। इसके पश्चात श्री आर. सुंदरम ने उद्घाटन उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण उनके जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब वे पिछले 35 वर्षों की यात्रा को स्मरण करते हैं, इस अवधि में स्वदेशी जागरण मंच ने भारत के लगभग तीन-चौथाई भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तार किया है और देश के लगभग सभी राज्यों के 500 से अधिक जिलों तक अपनी पहुँच बनाई है। पिछले तीन दशकों में वैचारिक स्तर पर भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश कार्यकर्ताओं ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ भारतीय विकास की अवधारणा को भी गहराई से समझा है। 

विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों ने भी जागरूकता फैलाने तथा स्वावलंबी भारत अभियान के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आर्थिक परिस्थितियाँ समय-समय पर बदलती रहती हैं। उदाहरण के लिए, 1991 में भारत को गंभीर ऋण संकट का सामना करना पड़ा था, किंतु उसके बाद के दशक में देश ने व्यापक आर्थिक सुधारों और विकास का अनुभव किया।

आज देश “विकसित भारत 2047” के संकल्प की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर और उच्च आर्थिक विकास आवश्यक होगा। लगभग 35 करोड़ लोगों की बड़ी जनसंख्या, जो लगभग संयुक्त राज्य अमेरिका की जनसंख्या के बराबर है, को प्रेरित कर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ना होगा। इस जनशक्ति को संगठित करके देश अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।

श्री सतीश कुमार ने दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद बैठक के मुख्य विषय बिन्दुओं एवं प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले दिनों देश भर में स्वदेशी संकल्प यात्राएं एवं स्वदेशी संकल्प दौड़ आदि अनेक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें समाज के विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी रही। स्वदेशी व्यापारी जुटान कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रांतों में नगर एवं ब्लॉक स्तर पर स्वदेशी टीमों के गठन के लिए कार्य किया जा रहा है। इस उद्देश्य से बस्ती और ग्राम स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन कर कार्यकर्ताओं को संगठित करने पर विशेष बल दिया गया है।

विकेंद्रित अर्थव्यवस्था हो उसके लिए स्थानीय संसाधनों को संगठित करने के लिए हमें प्रयास करने होंगे। प्रत्येक ज़िले को अपने ज़िले की योजनाएं बनानी हैं। क्षेत्र स्तर पर अपना-अपना कार्यक्रम, पंचाग हमें स्वयं तय करना होगा।

डॉ दीपक शर्मा (पूर्वोत्तर क्षेत्र संयोजक) द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों के संकलन की पुस्तिका का विमोचन मंचासीन अधिकारियों द्वारा किया गया।

उसके पश्चात सभी क्षेत्रों के कार्यवृत्त हुए। दक्षिण क्षेत्र-श्री सत्यनारायण (क्षेत्र समन्वयक), दक्षिण मध्य क्षेत्र-श्री लिंगामूर्ति (क्षेत्र संयोजक), पश्चिम क्षेत्र-श्री विनय खटावकर (क्षेत्र समन्वयक), मध्य क्षेत्र-श्री सुधीर दाते (क्षेत्र संयोजक), राजस्थान क्षेत्र-श्री सतीश आचार्य (क्षेत्र संयोजक), उत्तर क्षेत्र-श्री राजेश गोयल (क्षेत्र संयोजक), पश्चिमी उत्तर प्रदेश-डॉ. अमितेश (क्षेत्र संयोजक) द्वारा दिया गया।

सत्र का संचालन डॉ राजीव कुमार (अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख) द्वारा किया गया।

द्वितीय सत्र

इस सत्र में शेष बचे क्षेत्रों के कार्यवृत्त प्रस्तुत किये गये। पूर्वी उत्तर प्रदेश-श्री अनुपम श्रीवास्तव (क्षेत्र संयोजक), बिहार-झारखंड क्षेत्र-श्री अमरेंद्र (क्षेत्र संयोजक), पूर्वी क्षेत्र-श्री प्रसन्न क्षोत्री, पूर्वोत्तर क्षेत्र-डॉ दीपक शर्मा (क्षेत्र संयोजक) द्वारा दिया गया।

इसी सत्र में जागृति यात्रा के संयोजक एवं उत्तर प्रदेश में देवरिया से सांसद श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने जागृति मिशन यात्रा पर संक्षिप्त कार्यवृत्त सभी के समक्ष रखा। विशेषतः गोरखपुर के स्वावलंबन केंद्र, जिसके माध्यम से 300 से अधिक लोगों को रोज़गार दिया गया, इस पर भी उन्होंने जानकारी साझा की। उन्होंने बरगद क्रांति की आवश्यकता की ओर भी ध्यान दिलाया।

अखिल भारतीय सह-संयोजक एवं स्वावलंबी भारत अभियान के समन्वयक डॉ भगवती प्रकाश शर्मा ने वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य की बात को सबके समक्ष रखते हुए कहा कि भारत की 146 करोड़ की जनसंख्या पचास देशों की जनसंख्या से अधिक है और 117 ट्रिलियन डॉलर की विश्व की जीडीपी है। प्रति व्यक्ति आय अमेरिका में 92,000 डॉलर, चाइना में 14,000 डॉलर और भारत में केवल 343 डॉलर है। आज बहुत सारी चुनौतियां भारत के समक्ष है कि विश्व के 60 प्रतिशत कुल उत्पादन में सिर्फ़ चार देशों का योगदान सर्वाधिक है, जिसमें सबसे अधिक 32 प्रतिशत चाइना, 16 प्रतिशत अमरीका और केवल 2.9 प्रतिशत भारत का है। उन्होंने बताया कि 1992 में डंकल ड्राफ्ट और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के स्थापना के समय से ही स्वदेशी जागरण मंच ने देश में एक वैचारिक आंदोलन खड़ा किया। आगे चलकर स्वदेशी विचार और समझौतों ने देश को आर्थिक नीतियों के निर्माण तथा उनके वित्तीय प्रभावों को समझने की दिशा प्रदान की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियाँ और शक्तियाँ भी आज स्वदेशी जागरण मंच की गतिविधियों से प्रभावित हैं।

संघ की ओर से संपर्क अधिकारी माननीय श्री भाग्गैया जी का इस सत्र में मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल नारा नहीं अपनी जीवन शैली है कि हम सबका मानवता की रक्षा का दायित्व है और सृष्टि का कल्याण सदा से ही भारत का मूल मंत्र रहा है। स्वदेशी का मूल मंत्र भी प्रकृति का पोषण करना है न कि प्रकृति को नुक़सान पहुँचाना है। तात्कालीन विषयों का सामना करना है परंतु शाश्वत विषय को भी हमें ध्यान में रखना है। सच्चे अर्थ में सामान्य आदमी के कल्याण के लिए बात करनी चाहिए। आज यथा राजा तथा प्रजा तंत्र चलता है। परिश्रम करने की भावना को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी द्वारा कार्यकर्ता के अपेक्षित कार्यो और कार्य करने की शैली को बार-बार अनुसरण करने का आह्वान करने को कहा, जिससे हम भारत में ही नहीं वरन विश्व के  कल्याण के विषय में भी सोच सकते हैं।

सत्र का संचालन अखिल भारतीय संघर्ष वाहिनी प्रमुख श्री अन्नदा शंकर पाणिग्रही ने किया।

महिला कार्यकर्ता बैठक 

भोजन के उपरांत महिला कार्यकर्ताओं की एक संक्षिप्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आई 56 बहनों ने बैठक में सक्रिय सहभागिता की। इस बैठक में श्री सतीश कुमार, श्रीमती अर्चना मीना तथा डॉ. जितेंद्र गुप्त (अ.भा. समन्वयक, स्वावलंबी भारत अभियान एवं महिला कार्य के पालक अधिकारी) की विशेष उपस्थिति रही। देशभर से प्रांत महिला प्रमुखों के साथ परिचय एवं संवाद हुआ।

बैठक के दौरान स्वदेशी जागरण मंच में महिला कार्य की आवश्यकता, स्वावलंबी भारत अभियान, तथा स्वदेशी विचारों के विस्तार में महिलाओं की संभावित भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। अर्चना मीना ने “स्वदेशी परिवार - विकसित भारत का आधार” विषय पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए सभी बहनों से इस पुस्तक का अध्ययन करने और इसे परिवार, समाज, राष्ट्र तथा प्रकृति के व्यापक हित में आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों और बदलते सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इस प्रकार विविध क्षेत्रों से आई महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति ने बैठक को सार्थक और प्रेरणादायक बनाया।

तृतीय सत्र 

इस सत्र में दो व्यापारी संगठनों के प्रमुखों द्वारा व्यापारियों के समक्ष आनलाइन व्यापार से बढ़ती चुनौतियों एवं इसे लेकर बड़े अभियान के सम्बन्ध में चर्चा की। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (पंजीकृत) के अध्यक्ष श्री संदीप बंसल (लखनऊ) ने बताया कि उनका संगठन देशभर में 19 मार्च को हिंदू नववर्ष के निमित्त देश भर में कार्यक्रम आयोजित करने वाला है। देश के बड़े व्यापारिक संगठन कैट के अध्यक्ष श्री बी.सी. भरतिया ने बताया कि तकनीकी नवाचार और बदलावों को हमें अपनाना ही होगा, इसे हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। हमें ऑनलाइन व्यापार पर विचार करना होगा। हमें व्यापारी को यह सिखाने की आवश्यकता है कि वह हर खरीदार तक पहुँचें।

डॉ राजकुमार मित्तल द्वारा डिजिटल युद्ध में पारिवारिक सिस्टम व टेक्नोलॉजी ज़ोन-फ्री एरिया के विषय पर दिए गए विचारों में उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी का अत्यधिक प्रयोग मनुष्य की रचनात्मकता को लगातार कम कर रहा है। कई देश इस क्षेत्र में प्रयोग कर रहे हैं, जहाँ बच्चों और वयस्कों को कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी से मुक्त क्षेत्रों में रखा जा रहा है, ताकि उनकी प्राकृतिक रचनात्मकता, सामाजिक कौशल और पारिवारिक बंधन मजबूत हो सकें।

उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा बताई ‘MANAV’ कॉन्सेप्ट को विस्तार से समझाया, जो मानव-केंद्रित विकास और नैतिकता पर आधारित है। इसमें प्रत्येक अक्षर का अर्थ इस प्रकार हैः

  • M - Moral and Ethical values (नैतिक और सदाचारी मूल्य)
  • A - Accountability (जवाबदेही)
  • N - Rashtriya Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
  • A - Accessibility (सुलभता)
  • V - Validate and Legitimate (सत्यापन और वैधता)

डॉ धनपत राम अग्रवाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारतीय दृष्टिकोण विषय पर प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान युग ए.आई. का युग है, और इसमें भारत को अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी अन्यथा हम पीछे रह जाएंगे। उन्होंने वैश्विक ए.आई. इकोसिस्टम की वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए बताया किः

  • चीन सिलिकॉन (सिलिकॉन वेफर्स) का प्रमुख उत्पादक है।
  • ताइवान विश्व के लगभग 80 प्रतिशत चिप्स (सेमीकंडक्टर चिप्स) का निर्माण करता है, जो पूरी दुनिया को सप्लाई करता है।
  • अमेरिका ए.आई. के डिजाइनिंग, एल्गोरिदम और जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) में अग्रणी है, जो ए.आई. मॉडल ट्रेनिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग में भी अमेरिका का दबदबा है, और कई देश (यहाँ तक कि चीन भी) ए.आई. के लिए अमेरिकी क्लाउड सेवाओं पर निर्भर हैं।

लेकिन उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण तत्व ‘मानव प्रतिभा’ पर जोर दिया। ए.आई. की असली ताकत हार्डवेयर या सॉटवेयर से नहीं, बल्कि युवा प्रतिभा, नवाचार और रचनात्मकता से आती है और भारत में यह ह्यूमन टैलेंट प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, हमारे युवा, इंजीनियर और वैज्ञानिक दुनिया भर में ए.आई. क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

ए.आई. को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ जोड़कर, हम न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर नैतिक और संतुलित ए.आई. विकास में योगदान दे सकेंगे। इसके पश्चात सत्र में खुली चर्चा को आमंत्रित किया गया जिसमें अनेक बंधुओं ने भाग लिया और अपने सुझाव विचार रखे।

सत्र के अंत में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख माननीय स्वांत रंजन जी ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ अपने निर्धारित लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करेगा, परंतु अभी यह यात्रा पूर्ण नहीं हुई है। इसे किस प्रकार प्राप्त किया जाए, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखते हुए कार्य करना होगा। इस दिशा में विजयादशमी कार्यक्रम, घर-घर संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, सामाजिक समरसता गोष्ठियाँ, प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठियाँ, युवाओं के कार्यक्रम तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

सत्र का संचालन अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ ने किया।

चतु्र्थ सत्र 

चतुर्थ सत्र में स्वदेशी जागरण मंच के विभिन्न आयामों के कार्यवृत्त हुए। डॉ प्रदीप चौहान ने स्वदेशी शोध संस्थान के कार्यों पर प्रकाश डाला। श्री साकेत राठौड़ ने स्वर्णिम भारत वर्ष फाउंडेशन से जुड़े विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। मेला प्रमुख श्री शचिन्द्र बरियार ने स्वदेशी मेला के महत्व और उसके आयोजन की रूपरेखा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। श्री राधेश्याम चोयल ने उलेइंण्बवण्पद पोर्टल के माध्यम से चल रहे कार्यों की जानकारी दी। 

डॉ. अश्वनी महाजन ने विकास का भारतीय प्रतिमान विषय पर विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान वैश्विक विकास मॉडल, जिसमें जीडीपी ग्रोथ को ही देश के विकास का प्रमुख मानक माना जाता है, भारत ने भी काफी हद तक स्वीकार कर लिया है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मॉडल मूल रूप से गलत है। दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भी यही बात कही थी कि जीडीपी का बढ़ना विकास का सही मापदंड नहीं हो सकता। जीडीपी ग्रोथ को विकास का एकमात्र पैमाना मानना भ्रामक है, क्योंकि यह असमानता, पर्यावरण क्षरण और मानवीय मूल्यों की अनदेखी करता है। विकास की अवधारणा पर गहन विचार करने की आवश्यकता है।

2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की कल्पना केवल पुरानी अर्थव्यवस्था पर आधारित नहीं होनी चाहिए। हमारी भारतीय संस्कृति में त्याग की पूजा होती है - भामाशाह जी त्याग की जीवंत प्रतिमूर्ति थे। भारतीय दर्शन में भौतिक उन्नति के साथ आध्यात्मिक उन्नति को भी समान महत्व दिया जाता है। प्राचीन भारत का वैभव यही था - भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर संतुलन।

आज की स्थिति में हमें यह देखना है कि विकास के नाम पर गरीबी भी बढ़ रही है। इसलिए निराकरण की दिशा में योजनाएँ बनानी होंगी जो सबका पेट भरे, सब खुश रहें, और मुफ्त सेवाओं के साथ-साथ आत्मनिर्भरता, नैतिकता तथा पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दें। विकास को जीडीपी-केंद्रित नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, धर्म-आधारित, पर्यावरण-सुरक्षित और समावेशी होने के लिए आग्रह किया, ताकि भारत सच्चे अर्थों में विकसित और सुखी राष्ट्र बने।

सत्र का संचालन मध्य क्षेत्र संगठक एवं त्रि क्षेत्रीय युवा कार्य प्रमुख श्री केशव दुबोलिया जी ने किया।

पंचम सत्र

यह सत्र क्षेत्रशः बैठकों का रहा जिसमें प्रान्तों ने अपनी आगामी योजना पर चर्चा की। केन्द्रीय अधिकारी क्षेत्रों की बैठक में उपस्थित हुए। बैठक के विषय बिन्दुओं में पूर्णकालिक कार्यकर्ता एवं जिला प्रशिक्षकों की नियुक्ति,महिला ,युवा, वरिष्ठ नागरिक, पर्यावरण आयाम, प्रान्तीय विचार वर्ग, निधि संग्रह अभियान, जिला स्तर संगठन विस्तार योजना आदि विषयों पर योजना बनी। प्रांत स्तरीय नवीन दायित्वों की घोषणा इसी सत्र में हुई।

दक्षिण एवं दक्षिण मध्य क्षेत्र में श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’, पश्चिम क्षेत्र में श्री जितेन्द्र गुप्त, मध्य क्षेत्र में श्री सतीश कुमार, राजस्थान क्षेत्र में श्री बलराम नन्दवानी, उत्तर क्षेत्र में डॉ अश्वनी महाजन, पश्चिम उत्तर प्रदेश एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में डॉ राजीव कुमार, बिहार-झारखंड क्षेत्र में डॉ धनपत राम अग्रवाल, पूर्वी क्षेत्र एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में श्री अनन्दा शंकर उपस्थित रहे। बैठकों का संचालन क्षेत्र संयोजकों द्वारा किया गया।

विविध संगठन, अन्य संगठन, विविध आयाम प्रमुख, स्वदेशी शोध संस्थान के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अलग से बैठक हुई, जिसमें श्री आर. सुन्दरम, श्री कश्मीरी लाल, डॉ भगवती प्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। बैठक का संचालन श्री सतीश चावला ने किया।

षष्ठम सत्र

इस सत्र में अनेक विषयों पर चर्चा हुई। सर्वप्रथम स्वावलंबी भारत अभियान को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उत्तर क्षेत्र संयोजक डॉ राजेश गोयल ने जिला स्वावलंबन केन्द्रों को संचालित करने, जिलों में संचालित विभिन्न स्वावलंबन के कार्यो के साथ समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की एवं सुझाव लिये।

20 मार्च से 10 अप्रैल तक देशभर में चलने वाले निधि संग्रह अभियान के विषय में श्री सतीश चावला ने चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार अपना यह अभियान पेपर लैस एवं कैश लैस रहेगा। अलग-अलग तरह के दानदाताओं की सूचियां बनाकर टोलियों में कार्यकर्ताओं को जाना चाहिए।

पर्यावरण एवं भूमि सुपोषण अभियान के सम्बन्ध में श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ ने बताया कि औद्योगिक क्रांति के बाद धरती का तापमान निरन्तर बढ़ रहा है, जो अत्यंत खतरनाक संकेत है। अगले सौ वर्षों में मानवता का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है - यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्य है।

स्वदेशी शोध संस्थान एवं समृद्ध एवं महान भारत विषय पर स्वदेशी शोध संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने शोध संस्थान द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों के सम्बन्ध में जानकारी दी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं रोजगार पर बिहार-झारखंड क्षेत्र के संगठक श्री अजय उपाध्याय ने गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन के सम्बन्ध में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं को अपने गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराना होगा।

सत्र का संचालन दक्षिण मध्य क्षेत्र संयोजक श्री लिंगामूर्ति ने किया।

सप्तम सत्र

यह सत्र भी अनेक विषयों पर चर्चा का रहा। डॉ राजीव कुमार ने आगामी वर्ष के कार्यक्रमों का पंचांग प्रस्तुत किया। 19 मार्च स्वदेशी नववर्ष कार्यक्रम से लेकर 12 जनवरी 2027 युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती) तक के कार्यक्रमों का वर्ष भर के कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया। सभी क्षेत्रों को भी अपने-अपने क्षेत्र अनुसार कार्यक्रम पंचाग बनाने का आग्रह किया।

श्री केशव दुबोलिया ने देशभर में युवा कार्य को गति देने एवं जिला स्तर तक युवा प्रमुखों की नियुक्ति करने का आह्वान किया।

श्रीमती अर्चना मीना ने देशभर में महिला कार्य की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने देशभर में महिला इकाईयों द्वारा किये जा रहे नवीन प्रयोगों की जानकारी दी।

संगठन कार्य विस्तार एवं पूर्णकालिक योजना श्री सतीश कुमार ने संगठन के विस्तार और कार्य-योजना पर निम्न बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया- जिलों की संरचना, संगठन का विस्तार नगर, खंड, बस्ती और ग्राम स्तर तक किया जाए, प्रत्येक जिले में टीम-11 की इकाई का गठन किया जाए। स्वदेशी जागरण मंच, स्वावलंबी भारत अभियान की सभी की ग्राम इकाइयाँ बनें, इस दिशा में कार्य करना होगा। दायित्व देने के पश्चात जिले के अनुसार विचार वर्ग या जिला सम्मेलन आयोजित किए जाएँ। कार्यक्रम केवल औपचारिक (बमतमउवदपंस) न हों, बल्कि उद्देश्यपूर्ण हों।

सत्र का संचालन श्रीमती सुनीता भरतवाल ने किया।

अष्टम सत्र (समारोप सत्र)

समारोप सत्र का आरम्भ वन्देमातरम् से हुआ।

सर्वप्रथम व्यवस्था प्रमुख श्री लोकेंद्र नरूका ने इस अवसर पर व्यवस्था में लगे सभी कार्यकर्ता भाइयों एवं बहनों का परिचय कराया। देश भर से राष्ट्रीय परिषद की बैठक में आए विभिन्न प्रांतों के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना सहयोग करने वाली पूरी टीम को मंच पर आमंत्रित कर उनके योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

श्री कश्मीरी लाल ने नए दायित्वों की घोषणाएँ कीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निधि संग्रह अभियान एवं भूमि सुपोषण जैसे आगामी कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए प्रेरित किया तथा इन अभियानों की योजनाओं को सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा की। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने प्रांतों में खण्ड स्तर तक कार्य विस्तार करें, जिला स्तर पर प्रशिक्षकों के नाम तय कर विचार वर्गों के आयोजन की तैयारियाँ शीघ्र प्रारंभ करें। अंत में शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने अपने समापन उद्बोधन को समाप्त किया।

नवीन दायित्व

अखिल भारतीय
1.    डॉ. राजीव कुमार (मुरादाबाद, उ.प्र.) - अ.भा. सह-संयोजक (पूर्व-अ.भा. विचार विभाग प्रमुख)
2.    श्री दीपक शर्मा ‘प्रदीप’ (दिल्ली) - अ.भा. विचार विभाग प्रमुख (पर्यावरण प्रमुख के साथ)
3.    श्री अन्नदा शंकर पाणिग्रही (केंद्र गुवाहाटी) - अ.भा. संपर्क प्रमुख तथा दो क्षेत्र व आंध्र प्रदेश प्रभारी (पूव में अ.भा. संघर्षवाहिनी प्रमुख थे।) 
4.    डॉ. राजेश गोयल (पंचकूला) - अ.भा. सह-समन्वयक, स्वावलंबी भारत अभियान 
5.    श्रीमती सुनीता भरतवाल (भिवानी, हरियाणा) - अ.भा. सह महिला प्रमुख
6.    श्री राधेश्याम चोयल (अजमेर, राज.) - उलेइंण्बवण्पद (स्वावलंबी भारत अभियान-डिजिटल) प्रमुख
7.    श्री राजकुमार चतुर्वेदी (भीलवाड़ा, राज.) - जनसांख्यिकी लाभांश प्रमुख
8.    श्री केशव दुबोलिया (भोपाल, म.प्र.) - मध्य व पश्चिम क्षेत्र संगठक तथा युवा आयाम सदस्य
9.    श्री अनुपम श्रीवास्तव (लखनऊ, उ.प्र.) - पूर्वी व पश्चिम उ.प्र. क्षेत्र संयोजक

क्षेत्रीय

दक्षिण-मध्य क्षेत्र
1.    श्री वी. साई प्रसाद - क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख (तेलंगाना)
2.    श्री विजय कृष्ण - सह-क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख (तेलंगाना)
3.    श्री पी. साईनाथ - क्षेत्र वरिष्ठ नागरिक आयाम प्रमुख (तेलंगाना)

पश्चिम क्षेत्र
1.    श्री ईश्वर सज्जन (गुजरात) - सह-क्षेत्र संयोजक

मध्य क्षेत्र
1.    श्री अरूषेन्द्र शर्मा (सीहोर, म.प्र.) - क्षेत्रीय विचार विभाग प्रमुख

राजस्थान क्षेत्र
1.    श्री लोकेन्द्र (जयपुर) - क्षेत्र समन्वयक

उत्तर क्षेत्र
1.    श्री सतेन्द्र सरौत (फरीदाबाद, हरियाणा) - क्षेत्र संयोजक

पश्चिमी उत्तर प्रदेश
1.    श्री कपिल नारंग (मुरादाबाद) - क्षेत्र सह-संयोजक
2.    श्री कुलदीप सिंह (मुरादाबाद) - क्षेत्र समन्वक
3.    श्री विकास चौधरी (दिल्ली) - विशेष संपर्क प्रमुख (उत्तर व पश्चिम क्षेत्र)

पूर्वी क्षेत्र
1.    श्री रमाकांत पात्रा - क्षेत्र विचार विभाग प्रमुख
2.    डॉ. दीपक शर्मा - सह-विचार विभाग प्रमुख
3.     श्री प्रसन छोटेरे - प्रचार प्रमुख
4.     श्री शिरीष खरे - सह-प्रचार प्रमुख

असम क्षेत्र
1.    प्रो. डब्ल्यू.सी. सिंह (मणिपुर) - क्षेत्र संयोजक (असम)
2.     श्री अमल वैश्य (नलवाड़ी, असम) - क्षेत्र सह-संयोजक (असम)
3.    श्री सी.ए. रतन दास (अगरतला) - क्षेत्र संपर्क प्रमुख (त्रिपुरा)
4.    श्री पार्थ प्रतिम पाठक (गुवाहाटी) - क्षेत्र सह समन्वयक (उत्तर असम)

आयाम

व्यापारी जुटान 
1.    श्री जितेंद्र गुप्त (भोपाल, म.प्र.) - प्रमुख (पूर्व दायित्व भी रहेंगे।)
2.    श्री बी.सी. भारतीया (नागपूर) - सह प्रमुख 
3.    श्री संदीप बंसल (लखनऊ) - सह प्रमुख 
4.    श्री मनोहर शरण (केंद्र हैदराबाद) - सह प्रमुख (दक्षिण, दक्षिण मध्य व असम क्षेत्र)
5.    श्री धर्मेंद्र शर्मा (नोएड़ा, उ.प्र.) - सह प्रमुख 
6.    सीए हरीश चौधरी (दिल्ली) -  केंद्रीय टोली सदस्य 
7.    श्री राकेश द्विवेदी (मध्य प्रदेश प्रभारी) - कार्यालय मंत्री 

स्वदेशी वित्त सलाहकार परिषद
1.    श्री बलराम नंदवानी - प्रभारी 
2.    श्री अर्पित मित्तल - सचिव 
3.    श्री किशोर - सह सचिव 
4.    श्री जतिन टेहरी - संगठन सचिव 

भारतीय एक्सपोर्टर फोरम
1.    श्री राजीव सेतिया (गुरूग्राम) - संरक्षक
2.    श्री अनिल वर्मा - केंद्रीय टोली सदस्य
3.    श्री लक्ष्मण भवसिंहका - केंद्रीय टोली सदस्य (केंद्र दिल्ली) 
4.    श्री विद्या सागर - केंद्रीय टोली सदस्य 
5.    श्री अंबर अग्रवाल - केंद्रीय टोली सदस्य 
6.    श्री प्रीमत बैनर्जी - मुख्य सलाहकार

केंद्रीय कार्यालय (स्वदेशी जागरण मंच)
1.    डॉ. सुरेन्द्र (दिल्ली) - केंद्रीय कार्यालय प्रमुख 
2.    श्री अभयराम - सह-कार्यालय प्रमुख
3.    श्री महेंद्र वर्थवाल - सह-कार्यालय प्रमुख (फाउंडेशन के प्रमुख भी),
4.    श्री अमित चतुर्वेदी - कार्यालय टोली सदस्य (दिल्ली प्रांत कार्यालय प्रमुख भी),
5.    श्री अमित रायकवार - कार्यालय टोली सदस्य

स्वदेशी शोध संस्थान
1.    प्रो. दीपक शर्मा - केंद्रीय टीम सदस्य
2.    प्रो. चांद बाबू - केंद्रीय टीम सदस्य

प्रांतीय

दिल्ली
1.    श्री बलराज सिंह - पुराने कार्यकर्ता संपर्क प्रमुख (दिल्ली प्रांत)

तेलंगाना
1. श्री श्रीनिवासुला रेड्डी (हैदराबाद) - प्रांत सह-संयोजक

आंध्र प्रदेश
1. श्री राजेश - प्रांत संयोजक
2. डॉ. शेषागिरी - प्रांत सह-संयोजक
3. श्रीमति पावनी - प्रांत महिला प्रमुख
4. श्री राचा श्रीनिवास - प्रांत संगठक

ब्रज प्रांत
1.    श्री मनोज अग्रवाल - प्रांत संयोजक
2.    श्रीमति सावित्री शर्मा - प्रांत सह-महिला प्रमुख
3.    श्री अभिनव कश्यप - प्रांत सह-समन्वयक

मेरठ
1.    श्री प्रशांत महर्षि - प्रांत संयोजक
2.    श्री सुधांशु विश्नोई - प्रांत सह-संयोजक

गोरक्ष
1.    श्रीमति बिन्नी - प्रांत महिला सह-समन्वयक

अवध
1.    श्री रामकुमार दीक्षित - प्रांत सह-समन्वयक
2.    श्री राहुल सिंह - प्रांत सह-समन्वयक

कानपुर 
1.    श्री प्रवीण अग्निहोत्री - प्रांत सह-समन्वयक
2.    श्रीमति उर्मिला - प्रांत महिला सह-प्रमुख

उत्तर बिहार
1.    श्रीमति संगीता झा - प्रांत महिला प्रमुख

झारखंड
1.    श्रीमति नीतू सिन्हा - प्रांत महिला सह-प्रमुख

ओडिशा पूर्व
1.    श्री ए. श्रीनिवास राव - प्रांत संयोजक
2.    श्री प्रशांत भूयान - प्रांत सह-संयोजक
3.    श्री आदित्य महापात्र - प्रांत सह-संयोजक
4.    सुश्री दीप्ति रेखा मिश्रा - प्रांत महिला प्रमुख
5.    सुश्री प्रियदर्शिनी पाणि - प्रांत महिला सह-प्रमुख
6.    श्री विजय राऊत्रे - प्रांत समन्वयक
7.    श्री प्रबोध बदापंडा - प्रांत सह-समन्वयक    

ओडिशा पश्चिम
1.    श्री मनोरंजन राऊत्रे - प्रांत संयोजक
2.     श्री भीमसेन नायक - प्रांत सह-संयोजक
3.    सुश्री भारती पांडा - प्रांत महिला प्रमुख

उत्तर बंगाल
1.    श्री सुदीन लामा - प्रांत संयोजक

मध्य बंगाल
1.    डॉ. जयदीप बनर्जी - प्रांत संयोजक

दक्षिण बंगाल
1.    श्री उत्तम हुई - प्रांत संयोजक
2.    श्री तीर्थदीप चटर्जी - प्रांत सह-संयोजक
3.    इप्सिता चटर्जी - प्रांत महिला प्रमुख

मणिपुर
1.    श्री रोशनी कुमार सिंह - प्रांत संयोजक
2.    डा. राजेश सिंह - प्रांत सह-संयोजक
3.    डा. किशोरजीत सिंह - प्रांत समन्वयक
4.    डा. बिनोता थोकचोम - प्रांत महिला प्रमुख    

श्री आर. सुंदरम ने इस बैठक को अत्यंत सार्थक और भव्य बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान क्षेत्र के बड़े-बड़े उद्योगपति न केवल देश में बल्कि विश्वभर में अपने व्यापार और उद्योगों के माध्यम से भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके नगर चेन्नई तथा हैदराबाद में कई बाजार पर राजस्थान के उद्योगपतियों का वर्चस्व है, जहाँ उनके द्वारा बनाए गए सस्ते, अच्छे और पारंपरिक उत्पाद अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आह्वान किया कि अनुकूल वातावरण के चलते स्वदेशी के कार्य को जन-जन तक लेकर जाना है तभी देश को आत्मनिर्भर बनाने का स्वप्न साकार होगा।
समापन सत्र का संचालन डॉ राजीव कुमार ने किया।

राष्ट्रीय सभा का समापन राष्ट्र गान से हुआ।   

Resolution

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