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विकास प्रेरक सर्वस्पर्शी बजट

By Prof. Bhagwati Prakash Sharma • 13 Mar 2023
विकास प्रेरक सर्वस्पर्शी बजट

सप्तऋषि की भाँति सात मौलिक प्राथमिकताओं यथा समावेशी विकास, अंतिम व्यक्ति तक पहुँच, आधारिक रचनाओं व निवेश, अन्तर्निहित क्षमताओं के विकास, युवा, शक्ति हरित विकास तथा वित्तीय क्षेत्र पर केन्द्रित बजट में उच्च प्रौद्योगिकी विकास का भी ध्यान रखा गया है। - प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा

 

वर्ष 2023-24 बजट में देश के सभी वर्गों की अपेक्षाओं को यथोचित दृष्टिगत रखते हुए आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य साधे रखा गया है। सप्तऋषि की भांति सात मौलिक प्राथमिकताओं यथा समावेशी विकास, अंतिम व्यक्ति तक पहुँच, आधारिक रचनाओं व निवेश, अन्तर्निहित क्षमताओं के विकास, युवा, शक्ति हरित विकास तथा वित्तीय क्षेत्र पर केन्द्रित बजट में उच्च प्रौद्योगिकी विकास का भी ध्यान रखा गया है। वरिष्ट नागरिकों के लिए बचत सीमा को दोगुना कर महिला सम्मान बचत पत्र भी एक सराहनीय पहल है। सामान्य नागरिक अपनी अर्जित आय का यथोचित उपयोग कर सके व अपनी बचतों का इच्छानुरूप निवेष कर सकें, इस हेतु एक वैकल्पिक आयकर संरचना भी प्रस्तावित की गई है। अब कर बचाने हेतु अपनी बचतों को सरकारी योजनाओं में दीर्घकाल तक अवरूद्ध रखने को बाध्य नहीं हो इस हेतु एक वैकल्पिक नवीन कर योजना प्रस्तावित की गई है। इससे मध्यमवर्गी कर दाता अपनी बचतों को अधिक लाभप्रद व बेहतर लोचषीलता वाले निवेष अवसरों में निवेष कर सकेंगे। इससे देष में बचत व निवेष का स्वतःस्फूर्त वातावरण बनेगा। कृत्रिम बुद्धिमता, नई पीढ़ी के कौषल, 5 जी, आदि के साथ ही पर्यावरण सुधार, कृषि, पषुपालन व मत्स्यिकी आदि विकासोन्मुख बजट उपायों से समग्र विकास की सुदृढ़ रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

कृषि व सहकारिता हेतु समुचित प्रावधान 

कृषि क्षेत्र में पहले से ही पीएम किसान योजना के अन्तर्गत किसानों को सीधे नकद लाभ मिल रहा है। इस योजना के अन्तर्गत सरकार ने बीते वित्तीय वर्ष में 2.2 लाख करोड़ रू. किसानों के खातों में ट्रांसफर किए हैं। मोटे अनाज के उत्पादन, अनुसंधान व निर्यात में बढ़ोत्तरी के लिए ‘श्री अन्न योजना’ का प्रस्ताव भी किया है। इसके पीछे सरकार का उद्देष्य मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ उसका निर्यात भी बढ़ाना तथा पारंपरिक खाद्यान्नों जैसे गेहूं, चावल पर निर्भरता कम करना है। भारत मोटे अनाज के उत्पादन में वैष्विक केन्द्र बने इस हेतु मोटे अनाज पर अनुसंधान पर भी प्रावधान किया है। यह वर्ष (2023) मोटे अनाज का वर्ष भी है।

सरकार कृषि एवं सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने जा रही है। कृषि के संबंध में बजट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा युवा उद्यमियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि स्टार्टअप स्थापित करने के लिए ‘कृषिवर्द्वक निधि’ अर्थात एग्री एक्सीलेरेटर निधि की स्थापना भी प्रस्तावित की गई है। लंबे रेषेदार कपास का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी पीपीपी के माध्यम से क्लस्टर आधारित वैल्यू चेन का निर्माण, हाई वेल्यू बागवानी फसलों के लिए ‘आत्मनिर्भर स्वच्छ पौध कार्यक्रम’ के आरंभ की भी घोषणा की गई है। बजट में कृषि ऋणों को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रु. तक करने की घोषणा भी महत्वपूर्ण है। 

स्वास्थ्य, षिक्षा और आवास

लोक कल्याण की दृष्टि से स्वास्थ्य, षिक्षा व आवास के प्रावधान भी उल्लेखनीय हैं। देष में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के उदे्ष्य से सभी विद्यमान 157 मेडिकल कॉलेजों के पास इतनी ही संख्या में नर्सिंग कॉलेज खोलने के प्रस्ताव की घोषणा की गई है। इससे देष में नर्सिंग स्टाफ की कमी को पूरा किया जा सकेगा। देष में 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के पूरी तरह समाप्त करने के लिए मिषन की शुरुआत प्रस्तावित की गई है। चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान व नवाचार के लिए चुनी हुई आईसीएमआर की प्रयोगषालाओं की सुविधा सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को उपलब्ध कराई जाएगी। फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में नवाचार के उद्देष्य से उत्कृष्टता केन्द्रों के माध्यम से नवीन कार्यक्रम प्रारंभ किए जाने का भी प्रस्ताव किया गया है। 

षिक्षा मंत्रालय को बजट से 1.12 लाख करोड़ रूपये आवंटित किए हैं। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें व अन्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय की स्थापना भी प्रस्तावित है। षिक्षा की गुणवत्ता सुधार की दृष्टि से बजट में समाज के कमजोर वर्गों, खासकर 3.5 लाख जनजातीय छात्रों के लिए संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय  स्कूलों में 38 हजार 800 अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी।

गरीबों को आवास प्रदान करने वाली पीएम आवास योजना की बजट राषि 60 फीसदी बढ़ाकर 79 हजार करोड़ कर दी गई है। देष में ‘भविष्य के शहरों’ के विकास की दृष्टि से शहरी योजना में सुधार करने तथा म्युनिसिपल बांड निर्गमित करने की छूट का बजट एक अभिनव पहल है। शहरों के विकास के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ‘षहरी अधोसरंचना विकास निधि’ की स्थापना करेगी। इस निधि का संधारण राष्ट्रीय आवास बैंक करेगी।

सफाई कर्मियों को राहत व जोखिम मुक्ति

बजट में एक अहम घोषणा मानवीय गरिमा के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सीवेज लाइनों के मेनहोल की सफाई पूरी तरह से मषीनों से ही कराने की है जो एक सराहनीय कदम है। सफाई कामगार कई बार ऐसा करते समय मृत्यु का षिकार हो जाता था।

उन्नत प्रौद्योगिकी विकास पर बल

आर्टिफिषियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को बढ़ावा देने के लिए देष के तीन शीर्ष षिक्षा संस्थानों  में उत्कृष्टता केन्द्र खोलने की घोषणा की है। यह आज समय की आवष्यक मांग है। इस बजट की अन्य अहम बातों में अब पैन नंबर को ही पहचान का प्रमाण मानने, ई-न्यायालय परियोजना शुरू करने, 5जी सेवाओं के एप्लीकेषन तैयार करने, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सौ प्रयोगषालाएं स्थापित करने तथा देष में कृत्रिम हीरा उत्पादन को प्रोत्साहित करना आदि हैं। प्रधानमंत्री कौषल विकास योजना 4.0 को अगले तीन वर्षों में लाखों युवाओं को कौषल सम्पन्न बनाने के लिए शुरू की जाएगी और इसमें उद्योग जगत 4.0 से संबंधित नई पीढ़ी के आर्टीफिषियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, आईओटी, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन और सॉफ्ट स्किल जैसे पाठ्यक्रम सम्मिलित किए जाएंगे। कुषल युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध् कराने के लिए 30 स्किल इंडिया इंटरनेषनल सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।

आधुनिकीकरण के और भी प्रयास 

न्याय के प्रषासन में दक्षता लाने के लिए, 7,000 करोड़ रूपये के परिव्यूय से ई-न्यायालय परियोजना का चरण-3 शुरू किया जाएगा। पर्यावरण सुधार हेतु राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिषन की मदद से अर्थव्यवस्था को निम्न  कार्बन सघनता वाली स्थिति में ले जाने, जीवाष्म ईंधन के आयातों पर निर्भरता को कम करने 2030 तक 5 एमएमटी के वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऊर्जा-परिवर्तन तथा निवल कार्बन शून्यतम उद्देष्यों  और ऊर्जा सुरक्षा की दिषा में प्राथमिकता हेतु पूंजीगत निवेषों के लिए 35,000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। अर्थव्यवस्था को धारणीय विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। लद्दाख से नवीकरणीय ऊर्जा के निष्क्रमण और ग्रिड एकीकरण के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली 20,700 करोड़ रूपये के निवेष के साथ निर्मित की जाएगी।

सूक्ष्म व लघु उद्यमों को सहायता 

एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी योजना को नवीनीकृत किया गया है। यह पहली अप्रैल 2023 से कार्प्स में 9,000 करोड़ रुपये जोड़कर क्रियान्वित होगी। इसके अतिरिक्त इस योजना के माध्यम से 2 लाख करोड़ रुपये के ऋण संपार्षि्वक गांरटी से मुक्त हो सकेंगे। ऋण की लागत में भी लगभग 1 प्रतिषत की कमी आएगी। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत क्षेत्रीय कार्यालय में दाखिल विभिन्न फॉर्मों के केन्द्रीकृत प्रबंधन के माध्यम से कंपनियों की त्वरित कार्रवाई के लिए एक केन्द्रीय डाटा संसाधन केन्द की स्थापना की जाएगी। 

कारोबारी सुगमता के लिए 39,000 अनुपालनों को हटा दिया गया और 3,400 से अधिक कानूनी प्रावधानों को अपराध मुक्त कर दिया गया। सरकारी की विष्वसनीयता बढ़ाने की दिषा में 42 केन्द्रीय कानूनों में संषोधन के लिए जन विष्वास विधेयक लाया गया।  

युवाओं के लिए प्रषिक्षुवृत्ति

एकीकृत स्किल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरूआत कर कौषलवर्धन हेतु मांग आधारित औपचारिक कौषलवर्द्धन सक्षम करने, एमएमएमई सहित नियोक्ताओं के साथ जोड़ने और उद्यमिता योजनाओं की सुलभता सुगम करने के लिए डिजिटल तंत्र को और विस्तार प्रदान किया जाएगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय प्रषिक्षुता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत  तीन वर्षों में 47 लाख युवाओं को वृत्तिका सहायता प्रदान करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर शुरू किया जाएगा।       

आयकर सुधारः वैकल्पिक कर योजना

करदाता सेवाओं में और सुधार करने के लिए करदाताओं की सुविधा हेतु अगली पीढ़ी के सामान्य आईटी रिटर्न फार्म लाने और साथ ही षिकायत निवारण तंत्र को और सुदृढ़ किया जा रहा है। नई कर व्यवस्था में निजी आयकर में छूट की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रूपये कर दिया गया है। इस प्रकार नई कर व्यवस्था में 7 लाख रुपये तक के आय वाले व्यक्तियों को कोई कर का भुगतान नहीं करना होगा। नयी व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था में स्लैबों की संख्या 6 से घटाकर 5 कर दी गई और कर छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रूपये कर दिया गया है। इस नई कर व्यवस्था में सभी कर प्रदाताओं को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

आयकर में छूट की घोषणा से देष के करीब 40 करोड़ लोगों को फायदा होगा। व्यक्तिगत आयकर में छूट की सीमा 5 से बढ़ाकर 7 लाख करने के साथ ही आयकर स्लैब भी 6 से घटाकर पांच कर दिए हैं। नई व्यवस्था के अधीन अब 3 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई कर या टेक्स नहीं लगेगा, जबकि 3 से 6 लाख तक 5 प्रतिषत, 6 से 9 लाख तक 10 प्रतिषत, 9 से 12 लाख तक 15 प्रतिषत, 12 से 15 लाख तक 20 प्रतिषत तथा 15 लाख से ऊपर की आय वालों को पूर्ववत 30 प्रतिषत आयकर देना होगा। इसके अलावा व्यक्तिगत आयकर की उच्चतम अधिभार की दर 42.74 प्रतिषत को घटाकर अब 37 प्रतिषत कर दी गई है।

बचत के निवेष के बेहतर विकल्प

नई कर व्यवस्था में वेतन भोगी व्यक्ति को 50 हजार रुपए की मानक कटौती का लाभ देने और परिवार पेंषन से 15 हजार तक कटौती करने का प्रस्ताव है। नई कर व्यवस्था अपनाने वाले कर दाताओं के निवेष विकल्प बढ़ जाने से वे अपनी बचतों को इच्छानुरूप बेहतर आय व बिना लॉक इन अवधि वाले निवेष साधनों निवेषित कर सकेंगे। कुछ लोग इस नई  योजना के उद्देष्य को नहीं समझ कर यह प्रचारित कर रहे हैं कि इससे घरेलू बचत प्रभावित होगी। आज भारत जैसे देष में मांग, उत्पादन व रोजगार वृद्धि के लिए उपभोग में वृद्धि होना भी अच्छे परिणाम ही देगी। बचतों को उत्पादक निवेष की ओर मोड़ने में भी नई कर व्यवस्था बेहतर परिणाम देगी।

बचत संवर्द्धन हेतु योजना की सीमा दोगुनी व महिला सम्मान बचतपत्र

इस बजट में वरिष्ठ नागरिक खाता स्कीम की सीमा 15 लाख रूपये से बढ़ाकर 30 लाख रूपये करने का प्रस्ताव किया है। इसके साथ ही एकाकी वरिष्ट खाता धारकों के लिए भी जमा राषि की सीमा को दो गुना कर दिया है। अब व्यक्तिगत रूप से वरिष्ठ नागरिक 9 लाख रूपये तक जमा कर सकते हैं। पहले इसकी अधिकतम सीमा 4.5 लाख रूपये थी। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की ब्याज दर भी 1 जनवरी 2023 से 8 प्रतिषत कर दी गई थी। सरकार अब महिला सम्मान बचत पत्र योजना भी शुरू करेगी, जिसके अन्तर्गत महिलाओं को 2 लाख की बचत पर 7.5 फीसदी का ब्याज मिलेगा।

आधारित संरचना विकास पर बल 

सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख करोड़ के निवेष का प्रस्ताव किया है। बजट में 2.4 लाख करोड़ रूपये रेलवे को आवंटित किए हैं। इन निवेष प्रस्तावों से विकास दर को गति मिलेगी, रोजगार सृजित होगा और भावी विकास हेतु सुदृढ़ आधार बनेगा।

बजट आकार विस्तार

वर्ष 2023-24 का में बजट व्यय की राषि 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राषि प्रस्तावित है। चुनाव पूर्व वर्ष के बजट में भी केन्द्रीय बजट में सरकार ‘रेवडी कल्चर’ दूर रह कर इन्फ्रास्ट्रक्चर व टिकाऊ विकास पर बल दिये हुए है। वित्त मंत्री ने अपने बजट में आर्थिकी की मूलभूत कारकों पर जैसे कृषि, आवास, स्वास्थ्य, अधोसंरचना लोक कल्याण, कौषल विकास पर अधिक ध्यान दिया है।

प्रमुख क्षेत्रों को बजट आवंटन

विविध प्रमुख विभागों को बजट आवंटन अग्रानुसार है-

  • 2.40 लाख करोड़ रू. रेलव मंत्रालय
  • 1.96 लाख करोड़ रू. गृह मंत्रालय
  • 1.12 लाख करोड़ रू. षिक्षा मंत्रालय
  • 946 करोड़ रू. सी.बी.आई.
  • 700 करोड़ रू. से अधिक खेल मंत्रालय
  • 5.84 लाख करोड़ रू. रक्षा मंत्रालय
  • 3,114 करोड़ रू. उड्डयन मंत्रालय
  • 1,900 करोड़ रू. ई.वी.एम.
  • 1564 करोड़ रू. जगगणना 2021

सकल बजट अनुमानः बजट 2023-24 में कुल प्राप्तियां और कुल व्यय क्रमषः 27.2 लाख करोड़ रुपये और 45 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। निवल कर प्राप्तियां 23.3 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.9 प्रतिषत रहने का अनुमान। 2023-24 में राजकोषीय घाटे का वित्त पोषण करने के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारियां 11.8 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सकल बाजार उधारियां 15.4 लाख करोड़ रूपये होने का अनुमान है।          

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