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आत्मनिर्भर भारत ही सुरक्षित भारत

यूक्रेन-रशिया युद्ध से दो बातंे सामने आयी है। पहली बात यह है कि किसी बड़े देशों के उकसाने से युद्ध में नहीं उतरना चाहिए और दूसरी बात है कि युद्ध सिर्फ अपनी अंदरूनी ताकत के भरोसे से ही लड़ा जा सकता है। — अनिल जवलेकर

 

दुनिया में फिर एक बार युद्ध छिड़ गया है। आखिर रशिया ने यूक्रेन पर हमला बोल ही दिया। कई दिनों से यूक्रेन सीमा पर रशियन फौजों का जमाव हो रहा था। रशिया अपनी बात मनवाकर रहेगा, यह बात भी स्पष्ट हो चुकी थी। अमरीका भरोसे लायक नहीं है यह बात भी इस युद्ध से सामने आयी है। रशिया एक समर्थ राष्ट्र है और उसके सामने किसी छोटे राष्ट्र को उकसाना सही नहीं था। लेकिन आजकल अंतरराष्ट्रीय राजनीति ऐसी ही भडकाने वाली होती जा रही है। बड़े देश दुनिया के बहुत सारे छोटे देश को लड़वाकर ही अपनी रोटी सेंकते है। शस्त्र-अस्त्रों का कारोबार अब भी बड़ा है और यह बात छुपी नहीं है, जबकि इसका व्यापार सामने नहीं आता और अस्त्र-शस्त्र की परिभाषा भी संदिग्ध रही है। अमरीका और रशिया अस्त्र-शस्त्र के सबसे बड़े निर्यातक देश रहे है। दुनिया के 75 प्रतिशत से ज्यादा शस्त्रों-अस्त्रों की निर्यात अमरीका, रशिया, फ्रांस, जर्मनी और चीन यह पाँच देश करते है। भारत भी शस्त्रांे-अस्त्रों का बड़ा आयातक देश रहा है और रशिया, फ्रांस और इस्रायल से शस्त्र-अस्त्र मँगवाता रहा है। अपना पड़ोसी पाकिस्तान इस मामले मंे ज़्यादातर चीन के भरोसे है। कहने की बात यह है कि दुनिया भर की शांति में आग लगाने और बुझाने का काम बड़े देश ही करते है, जिसमें अमरीका और यूरोपीय देश मुख्य है। यूक्रेन भी इन्हीं के भरोसे रशिया से टकराया था और अंजाम सबके सामने है। 

भारत भी युद्ध की कगार पर 

युद्ध की स्थिति तो भारतीय सीमा पर भी है। यहाँ तो युद्ध भी हुए है। लेकिन बाहरी देशों को इसकी कोई परवाह नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की यही असलियत है। अमरीका और यूरोपीय देश अपने स्वार्थ के लिए ही किसी की मदद करते है। उनका दुनिया भर में शांति हो, ऐसा प्रयास नहीं रहता। इसलिए भारत की सीमा पर क्या स्थिति है इससे उनको सरोकार नहीं। भारत के बारे में झूठी बाते फैलाना और यहाँ की अंदरूनी बातों में दखलअंदाजी कर, यहाँ अस्थिरता पैदा करने की उनकी कोशिश जरूर होती है। इसका कारण एक तो यह है कि भारत किसी एक गुट में शामिल नहीं है और दूसरे, भारत समर्थ और आत्मनिर्भर हो, यह कोई नहीं चाहता। और यही बात भारतीयों को समझना जरूरी है। आत्मनिर्भर और समर्थ भारत ही सारी समस्याओं का उत्तर है। 

भारत की आत्मनिर्भरता की बात बड़े देशों की परेशानी 

भारत एक भौगोलिक और लोक संख्या की दृष्टि से बड़ा देश है, यह बात दुहराने की जरूरत नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि बाहरी देश भारत को एक बाजार समझते है और इसलिए भारत गरीब और लाचार बनकर रहे, यह सभी देश चाहते है। कम से कम आधुनिक तकनीकी और इससे जुड़ी यंत्र सामग्री तथा सैन्य शक्ति की जरूरतों के लिए भारत परावलंबी रहे तो सभी बड़े देशों के लिए अच्छा है। यही पर सब गड़बड़ हो रही है। भारत समर्थता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।  इससे बाहरी देश परेशान होना स्वाभाविक है। उनकी कोशिश यही रहेगी कि भारतीय शासन व्यवस्था अस्थिर रहे और यहाँ का समाज अराजकता की स्थिति में आए और देश मदद के लिए झोली फैलाये उनके सामने खड़ा रहे।  

भारत एक शांति प्रिय देश 

भारत सदियों से शांतिपूर्ण देश रहा है। भारत ने किसी देश पर हमला किया हो और उसको गुलाम बनाया हो ऐसा उदाहरण इतिहास में नहीं है। भारत के लोग बाहरी देशों में गए जरूर है लेकिन वह सिर्फ व्यापार और मानवी हित की बात करने के लिए। लेकिन भारत पर जरूर बाहरी हमले होते रहे है और भारत गुलाम भी रहा है। स्वतंत्रता के बाद देश ने सिर्फ शांति की बात की है। और सभी देशों में शांति हो और आपसी मतभेद बातचीत से सुलझाये  जाए ऐसी भूमिका रखी है। दुनिया यह बात अभी नहीं समझी और फिर एक बार महायुद्ध की कगार पर पहुँच गई है। 

भारत ने गलती सुधारी है 

भारत ने 1962 चीन युद्ध की हार से बहुत कुछ सीखा है। भारत की अपनी सैन्य शक्ति को नजरअंदाज करना या कम आँकना बहुत बड़ी गलती थी जो चीन युद्ध के बाद सुधारने की कोशिश की गई। बाद के जो भी युद्ध हुए भारत ने निश्चित विजय हासिल की। लेकिन वह सारे युद्ध अकेले पाकिस्तान के साथ थे। भारत को तो चीन और पाकिस्तान दोनों देशों से एकसाथ युद्ध की तैयारी करनी होगी। यह युद्ध एक अंतिम सत्य है। कुछ देर टाला जा सकता है लेकिन रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह भारत पर निर्भर नहीं है। दोनों पड़ोसी देशों की प्रकृति युद्ध की है और वृति युद्ध करने की है। वह इर्शालु होने के कारण खुद डूबे तो भी भारत का नुकसान होने से खुश होंगे। और इसलिए युद्ध करेंगे। यह अच्छा है कि भारत को यह बात ध्यान में है और इसलिए दोनों से मुक़ाबला कर सके ऐसा समर्थ होने की कोशिश में है। 

भारत के प्रयास 

यह सही है कि भारतीय डिफेंस दुनिया में दूसरे नंबर का कहलाता है लेकिन जिस तरह से दुनिया बदल रही है और तंत्र ज्ञान बदल रहा है, युद्ध नीति भी बदल रही है और इसलिए भारत को वह सब बातें ध्यान में रखकर तैयारी करनी होगी, तभी भारत सुरक्षित होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सैन्य शक्ति के विषय में दूसरे देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। तंत्र ज्ञान भी अपना होना जरूरी है। यह बात गर्व की है कि इस बारे में भारत प्रयत्नशील है। भारत के 2022-23 के वार्षिक बजट मंे 5.25 लाख करोड़ रूपये का प्रावधान डिफेंस के लिए किया है और उसमें से 1.52 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्चे के लिए है। यह सही है कि इसमें से बहुत सारा खर्चा बाहरी देशों से सुरक्षा सामग्री आयात पर होगा, जैसे के नए शस्त्र, लड़ाकू विमान वगैरह। साथ ही वित्तमंत्री ने इस विषय में आत्मनिर्भरता की बात की है और कुछ उपायों की घोषणा भी की है, जो अच्छी बात है। लगभग 68 प्रतिशत पूंजीगत खर्चा देशांतर्गत खरीदी पर होगा और 25 प्रतिशत रिसर्च बजट, नए भारतीय स्टार्ट-अप और निजी क्षेत्र के लिए रखा गया है, जिसे नया संशोधन और नई सुरक्षा सामग्री बनेगी। इससे डिफेंस में भारतीय उद्योग खड़े होंगे, जो मददगार साबित होंगे। जल सेना का आधुनिकीकरण इसमें शामिल है और वायु सेना (एयर फोर्स) को भी अच्छा करने की कोशिश है। बॉर्डर क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की बात भी मायने रखती है, जिससे जवानों को आसानी से  इस क्षेत्र में भेजा जा सकेगा और उनको जरूरी समान पहुंचाया जा सकेगा। 

भारत को  समर्थ और आत्मनिर्भर होना जरूरी 

विश्व शांति की बात अभी भी दूर है और दुनिया में युद्ध होते रहे है और भारत भी इससे अलग नहीं रह सकता। भारत के पड़ोसी तो युद्ध की ताक में बैठे है। यूक्रेन-रशिया युद्ध से दो बातंे सामने आयी है। पहली बात यह है कि किसी बड़े देशों के उकसाने से युद्ध में नहीं उतरना चाहिए और दूसरी बात है कि युद्ध सिर्फ अपनी अंदरूनी ताकत के भरोसे से ही लड़ा जा सकता है। इसलिए भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी और सुरक्षा पर ज्यादा खर्चा करना होगा। इसमें महत्वपूर्ण है, नई तकनीकी का संशोधन और स्वीकार। बाहरी देश जिस तरह से तकनीकी अपना रहे है उसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और भारत को भी अपनी तकनीकी विकसित करते हुए भी बाहर जो भी हो रहा है उसको अपनाना होगा। अंदरूनी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अंदरूनी कानून व्यवस्था और बाहरी सुरक्षा साथ-साथ समर्थ और आत्मनिर्भर होने से ही भारत सुरक्षित रह सकता है।

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