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स्वतंत्रता का असली अर्थ स्वदेशी ही : प्रो. भगवती प्रकाश

देश के विकास एवं उन्नति के लिए स्वदेशी की महती आवश्यकता है। स्वदेशी, केवल वस्तु उपयोग नहीं अपितु, प्रत्येक भारतीय में स्वदेश के भाव जागरण का नाम है। स्वदेशी से ही भारत की एकता, संप्रभुता कायम रह सकती है। वहीं, भारत के आर्थिक विकास की गाथा भी स्वदेशी से ही लिखी जा रही है। स्वदेशी हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसलिए स्व को पहचानना और देश प्रथम की भावना जागृत कर भारत की स्वतंत्रता का सही मायने में अर्थ स्वदेशी से ही निकलता है। उक्त विचार त्रिपुरा विश्ववद्यालय के एमबीबी सभागार में आयोजित स्वदेशी उद्यमिता मंथन कार्यक्रम में बोलते हुए स्वावलंबी भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने व्यक्त किये। प्रो. शर्मा ने कहा त्रिपुरा भारत का छोटा राज्य हो सकता है, किन्तु विश्व के कई देशों से बड़ा है और यहां के युवाओं की क्षमता असिमित है। यदि सभी युवा उद्यमिता की ओर अग्रसर हो जाएं तो त्रिपुरा भारत के आर्थिक उन्नयन में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यहां के लोग 14 देवताओं के चतुर्दश रूप की पूजा करने वाले प्रकृति, संस्कृति एवं उन्नति के उपासक हैं। यहां रोजगार की असीमित संभावाएं हैं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस. एन. धींगड़ा ने कहा कि भारत को 1947 में आजादी उपनिवेशवाद से मिली, लेकिन अंग्रेजों ने जाते-जाते अपने तंत्र को अंग्रेजियत से इतना सरोबार कर दिया कि अंग्रेज चले गये लेकिन अंग्रेजियत नहीं गई। संविधान निर्माण से लेकर भारत के कानून एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का ताना-बाना आजादी देने से पूर्व ही बुन दिया गया था जिसे लंबे समय से भारत ढोता आ रहा है। यदि स्वतंत्रता का सही अर्थ निकालना है और भारत को विश्व में स्वतंत्रता के मापदंड से मुखर करना है तो हमारे पास स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प है। 

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दीपक शर्मा ने कहा कि स्वदेशी हमारी उन्नति का रास्ता है। विश्वविद्यालय ने दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार सृजन-संसाधन केन्द्र के माध्यम से विगत वर्षों में त्रिपुरा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अतिरिक्त राज्य के अन्य विद्यार्थियों हेतु भी रोजगार सृजन के विभिन्न आयामों पर कार्य किया है और यह निरंतर जारी रहेगा। केन्द्र मानसिकता परिवर्तन से लेकर उद्योग एवं अकादमिक सहभागिता के माध्यम से बैंबू, रैमी, पोटैटो फाइबर, कागज निर्माण एवं मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी विद्यार्थियों को कुशल प्रशिक्षण देकर पारंगत कर रहा है। त्रिपुरा विश्वविद्यालय, राज्य में विद्यार्थियों मध्य जॉब सीकर की अपेक्षा जॉब प्रोवाइडर की मानसिकता की प्रेरणा का केन्द्र बनता जा रहा है। भारत के विकास में प्रत्येक युवा का अपना अहम स्थान है जिसके लिए शैक्षिक संस्थानों को ही नहीं, समाज को भी आगे आने की नितांत आवश्यकता है। 

इस अवसर पर प्रसिद्ध समाजसेवी एवं स्वदेशी के राष्ट्रीय पदाधिकारी अन्नदा शंकर पाणिग्रही ने रियल प्लानेट का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार त्रिपुरा का एक युवा पूरे देश में ही नहीं बल्कि विश्व में हैंडिक्राफ्ट ऑउटलेट्स की श्रंखला का निर्माण कर करीब 1500 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है और 1200 करोड़ रु. से अधिक की कंपनी का निर्माण कर चुका है। ऐसा युवा हमारे लिए रोल मॉडल हैं। अन्नदाजी ने ऐसे अन्य कई सफल व्यक्तियों के सफलता संबंधी उदाहरण प्रस्तुत किए। 

कार्यक्रम कें बोलते हुए टेक्नो इंडिया, त्रिपुरा के कुलपति प्रो. रतन कुमार साहा ने कहा कि यहां युवा सह अवसर पाकर देशभर में अच्छा नाम कर रहे हैं। उन्होंने कई सफल युवाओं के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति (प्र.), प्रो. श्यामल दास ने अपनी अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हमें अपने देश में बनी वस्तुओं का अधिकाधिक उपयोग कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपने योगदान को सुनिश्चित करना होगा। 

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन प्रो. शाओन राय चौधुरी, निदेशक, आईक्यूएस, त्रिपुरा विश्वविद्यालय ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीबाकर देब, प्राचार्य, टेक्नो इंडिया अभियांत्रिकी महाविद्यालय, अगरतला ने दिया। त्रिपुरा विश्वविद्यालय, टेक्नो इंडिया तथा स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुनीन्द्र मिश्र, उप कुलसचिव, त्रिपुरा विश्वविद्यालय ने किया। कार्यक्रम में राज के 1200 से अधिक युवाओं ने सहभागिता की तथा लाभान्वित हुए।  

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