“जय स्वदेशी-जय-जय स्वदेशी“ के उद्घोष के साथ भारतीय चित्ति के अद्भुत आलोक पुंज, चिर सन्यासी स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती 12 जनवरी से लेकर स्वतंत्रता संघर्ष के सजग सिपाही सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस 23 जनवरी 2026 तक देश के सभी 45 प्रांतों के 564 जिलों में स्वदेशी संकल्प दौड़ के 52635 कार्यक्रम संपन्न हुए, जिसमें रिकॉर्ड 68,29,360 युवाओं ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय गौरव और स्वदेशी मूल्यों के साथ आत्मनिर्भर भारत के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (शिक्षा मंत्रालय) भारत सरकार के दिशानिर्देशों के आलोक में 12 दिवसीय स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन स्वदेशी जागरण मंच-स्वावलंबी भारत अभियान द्वारा किया गया।
स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती (12 जनवरी 2026) जिसे वर्ष 1984 से ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर आयोजित कन्याकुमारी में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक श्री आर. सुंदरम ने हरी झंडी दिखाकर स्वदेशी संकल्प दौड़ का शुभारंभ किया। इस मौके पर उनके साथ अखिल भारतीय सहसंगठक श्री सतीश कुमार तथा कार्यकारिणी सदस्य श्री दीपक शर्मा भी उपस्थित रहे। वहीं लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की उपस्थिति में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। इस क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, छत्तीसगढ़ राज्य के मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने-अपने राज्यों में कार्यक्रम की अगुवाई की। स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख डॉ राजीव, देवरिया से सांसद शशांकमणि त्रिपाठी, मुरादाबाद में रितेश गुप्ता के साथ-साथ जयपुर व्यापार संघ के महामंत्री सुरेश सैनी, नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष सुनील सिंधी, जयपुर व्यापार मंडल के सुभाष गोयल आदि ने भी विभिन्न कार्यक्रमों का नेतृत्व करते हुए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वदेशी जागरण मंच और स्वावलंबी भारत अभियान के नेतृत्व में स्वामी जी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी जागरूकता बढ़ाना और भारतीय उत्पादों को समर्थन देना,स्वस्थ जीवन शैली, अनुशासन और टीमवर्क की संस्कृति का निर्माण करना, राष्ट्रीय एकता और सामुदायिक भागीदारी को सशक्त बनाना तथा नए भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका के लिए विवेकानंद जी की शिक्षाओं से विद्यार्थियों में प्रेरणा जागृत करना था।
कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी अपनाओ, देश को अपनाओ, आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाओ का आह्वान करते हुए स्वदेशी स्वरोजगार और नए भारत में युवाओं की भूमिका को लेकर प्रेरक संबोधन दिए गए। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए श्री कश्मीरी लाल ने कहा कि स्वदेशी भारत की आत्मा से जुड़ा हुआ विचार है। विवेकानंद जी ने कहा था कि ’जो राष्ट्र अपने पांव पर खड़ा नहीं हो सकता, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता’। स्वदेशी इस दिशा में खड़े होने का प्रभावी कदम है। उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी संकल्प दौड़ की जड़ में आर्थिक सशक्तिकरण, कौशल का सम्मान, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का भाव निहित है।
’विचारों में विवेकानंद कर्मों में स्वदेशी’ और ’रन फार स्वदेशी रन फार भारत’ का जयघोष कर विवेकानंद जी को श्रद्धांजलि देते हुए स्वदेशी, युवा शक्ति एवं आत्मनिर्भरता विषय पर प्रेरणादायी विचार विमर्श आयोजित हुए। देश के विभिन्न क्षेत्रों में देश भक्ति गीत, भाषण प्रतियोगिता एवं लघु नाटिकाओं से सुसज्जित संस्कृतिक कार्यक्रम हुए। युवाओं के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर संवादात्मक विमर्श भी आयोजित किए गए। इस दौरान भारी संख्या विद्यार्थियों ने विशेष रूप से स्वदेशी संकल्प शपथ ली।
12 जनवरी से लेकर 23 जनवरी 2026 तक पूरे भारतवर्ष में एक लाख से अधिक स्वदेशी संकल्प दौड़ और स्वदेशी संकल्प सभाओं का आयोजन हुआ। बारह दिवसीय आयोजनों में देश के पांच करोड़ से भी अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर स्वदेशी संकल्प यात्राएं आयोजित की गई। इस दौरान स्वदेशी संकल्प दौड़ में शामिल प्रतिभागियों को विशेष प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।