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रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश की आवश्यकता

By Vinod Johri • 22 Jan 2025
रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश की आवश्यकता

देश की सुरक्षा की वृहद दृष्टि सरकार के सामने है और गंभीर चुनौतियां भी। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम दोगुना आवंटन वांछित है और इसके लिए सरकार को कठोर उपाय करने की आवश्यकता है। — विनोद जौहरी

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट निकट भविष्य में संसद में प्रस्तुत किया जायेगा। विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और मीडिया में कुछ समय से रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की आवश्यकता पर विश्लेषण, समाचार और लेख प्रकाशित हो रहे हैं। भारत की सामरिक सुरक्षा को लेकर जनमानस में बहुत चिंता है क्योंकि हमारा देश चीन और चीन समर्थित पाकिस्तान से उत्तर, पूर्व से पश्चिम तक घिरा है जिनका युद्धोन्माद और भारत पर आक्रामकता से सभी परिचित हैं। चीन की आक्रामकता और हिंद महासागर में उसका विस्तारवाद एवं संरक्षणवाद भारत के अहित में है। भारत के काश्मीर और लद्दाख के अवैध कब्जे में चीन पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरीडोर और काराकोरम हाइवे चीन को सेंट्रल एशिया में बढ़त दिलाता है भूमध्य सागर और युरोप तक चीन को सामरिक रूप से प्रभावशाली बनाता है। इस विषय पर बेबाक चर्चा आवश्यक है और वस्तुस्थिति को धरातल पर समझने और उसके लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। बजट को अर्थव्यवस्था के गुणा-भाग और आयकर दरों, छूट और जीएसटी के मीडिया में चर्चा से ऊपर उठकर देश की अभेद्य सुरक्षा को जनमानस की संवेदनशीलता से जोड़ने की आवश्यकता है। 

अभी 8 जनवरी 2025 के टाइम्स ऑफ इंडिया में एक समाचार प्रकाशित हुआ कि वायु सेना प्रमुख चीफ मार्शल एन.पी. सिंह ने भारतीय वायुसेना में शोध, आधुनिकतम रक्षा प्रणाली के उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर देश को चेताया है। चीन ने अभी हाल में ही दो नये छठे जेनेरेशन के स्टील्थ फाइटर जेट के लांच ने विश्व भर में गहरी चिंता व्याप्त कर दी है। जबकि भारत चौथी जेनेरेशन के तेजस मार्क- 1ए फाइटर जेट के जीई-एफ 404 टर्बोफैन जेट इंजन के लिए अमेरिका से आयात पर निर्भर हैं और स्वयं अमेरिका पांचवीं जेनेरेशन के फाइटर जेट के लिए अनुसंधान के स्तर पर ही सीमित है। वायु सेना प्रमुख ने तेजस के लिए अमेरिका से इंजन आपूर्ति पर देरी के गहरी चिंता व्यक्त की है। हमारी वायु सेना को 180 तेजस मार्क-1ए और 108 तेजस मार्क-2 की आवश्यकता है। उनकी चिंता को चीन की अति आधुनिक और छठे जेनेरेशन के फाइटर जेट की तैयारी को लेकर है। चीन ने पांचवीं जेनेरेशन के चेंग्डू जे-20 फाइटर जेट अपने सामरिक एअर बेस होतान और शिगात्से में पहले ही तैनात कर रखे हैं। इन तैयारियों से भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका भी बहुत पीछे हैं। 

चीन अपनी वायु सेना के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश कर रहा है और भारत की अपेक्षा कहीं अधिक।  रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश की आवश्यकता है। पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए रु. 6.21 लाख करोड़ का आवंटन किया था। निस्संदेह भारत ने सीमाओं पर सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है और हमारी सेनाओं का सीमाओं तक द्रुत गति से युद्ध की स्थिति में पहुंचने के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने बड़ी संख्या में चौड़ी सड़कें, टनल, एअर स्ट्रिप, और वायु सेना के भारी भरकम विमानों के उतरने की इमरजेंसी लैंडिंग की व्यवस्था की है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने एडवांस मीडियम कंबेट एअरक्राफ्ट (एएमसीए) के लिए रु. 15000 करोड़ की लागत से प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए अनुमोदन किया जो अगले चार पांच वर्षों में पहली उड़ान भरेगा और इसका उत्पादन वर्ष 2035 में प्रारंभ होगा। रक्षा मंत्रालय ने मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड के साथ रु. 1,614.89 करोड़ के साथ 14 फास्ट पैट्रोल वैसेल को निर्मित करने और आपूर्ति करने का समझौता किया है।

9 जनवरी 2025 को प्रकाशित एक समाचार के अनुसार भारत के सुरक्षा बलों ने एक इंटीग्रेटेड सेटेलाइट कम्यूनिकेशन ग्रिड बनाने के लिए योजना बनाई है जिसमें अंतरिक्ष में विभिन्न ग्रहपथों (ऑर्बिट) में स्पेसक्राफ्ट स्थापित किए जायेंगे जिनका डाटा रिले सिस्टम नये युद्ध के वातावरण में उपलब्ध हो सकेगा।

4 सितंबर 2024 को प्रकाशित समाचार के अनुसार रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में रक्षा मंत्रालय के डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने दस कैपिटल एक्विजिशन प्रस्तावों को अनुमोदित किया जिनका मूल्य रु० 1,44,716 करोड़ है। इन प्रस्तावों में फ्यूचर रेडी कांबेट वाहनों (एफ आर सी वी) का निर्माण है जो 1700 रूसी टैंक टी-92 को विस्थापित करेंगे। इस आवंटन में इसके अतिरिक्त एअर डिफेंस फायर कंट्रोल राडार, डोर्नियर - 228 एअरक्राफ्ट, नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट कंट्रोल और ऑफशोर पेट्रोल वेसेल की खरीद का प्रावधान है। एफ आर सी वी तीनघ् चरणों में प्राप्त किये जायेंगे जिनमें पहले चरण में 590 एफआरसीवी खरीदें जायेंगे। वास्तविकता यह है कि पूर्व सरकारों ने हमारी थलसेना, वायु सेना और नेवी को पर्याप्त बजट आवंटन नहीं किया। दुर्भाग्य यह भी है कि राजनीतिक पटल पर विपक्षी दल हमारी ही सेनाओं का मनोबल गिराते हैं और अपमान की भाषा बोलते हैं। किसी चुनाव में देश की रक्षा कभी किसी विमर्श में नहीं आता। 

एक अन्य समाचार के अनुसार वायुसेना प्रमुख चीफ मार्शल एपी सिंह ने गणतंत्र दिवस से पूर्व नेशनल कैडेट कॉर्प्स (एन सी सी) के कार्यक्रम में युवा कैडेट्स को राष्ट्र निर्माण के तैयार होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आवश्यक नहीं कि हर फौजी वर्दी में हो, बल्कि बिना वर्दी पहने भी प्रत्येक नागरिक देश की सेवा कर सकता है। तात्पर्य यह है कि हमारी सेनाओं की अभेद्य सुरक्षा के अलावा देश की नयी पीढ़ी और युवाओं में देश की रक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञता भी आवश्यक है। परंतु वास्तविकता यह है कि गिने चुने विद्यालयों में एन सी सी युनिट हैं। ऐसे में सोशल मीडिया में खोयी नयी पीढ़ी में देश की सुरक्षा और स्वंय को देश की सुरक्षा के प्रति तत्पर होने की प्रेरणा कैसे मिलेगी ? देश की सुरक्षा पर लाखों करोड़ रुपए के निवेश के बावजूद यदि दिशाहीन और किंकर्तव्यविमूढ़ युवाओं में देश के लिए न्यौछावर होने की भावना नहीं हो, तो देश के भविष्य के लिए युवाओं को दिशा देने की आवश्यकता है। 

देश की सुरक्षा की वृहद दृष्टि सरकार के सामने है और गंभीर चुनौतियां भी। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम दोगुना आवंटन वांछित है और इसके लिए सरकार को कठोर उपाय करने की आवश्यकता है।     

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