मध्य-पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के वैश्विक प्रभावों को लेकर स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने चिंता व्यक्त करते हुए भारत में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है। संगठन ने कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण तेल, गैस, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ. अश्वनी महाजन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि संभावित कमी की आशंका के चलते कुछ जगहों पर जमाखोरी और घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) की स्थिति देखी जा रही है। एलपीजी सिलेंडरों की दैनिक बुकिंग, जो सामान्यतः 55 से 60 लाख के बीच रहती थी, बढ़कर 75 से 88 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। वहीं पेट्रोल की मांग में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में पेट्रोल की मांग 46 प्रतिशत बढ़ने का उल्लेख किया गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है तथा सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से आपूर्ति जारी है, बावजूद इसके अफवाहों के कारण कृत्रिम कमी की स्थिति बन रही है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मध्य-पूर्व तनाव और बढ़ता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने भारत की आयात पर निर्भरता की कमजोरियों को उजागर किया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत और गैस का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिसे दीर्घकाल में कम करना आवश्यक है। संगठन ने सौर, पवन, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तेजी से अपनाने की जरूरत बताई।
मंच ने नागरिकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, अफवाहें न फैलाएं, राष्ट्रीय एकता बनाए रखें तथा पेट्रोल-डीजल और गैस की बचत करते हुए वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दें। संगठन का मानना है कि सरकार, उद्योग और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिल सकती है।

