कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश की आर्थिक प्रगति में नवाचार, अनुसंधान और पेटेंट की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने की दिशा मिली।
मुख्य वक्ता के रूप में इंटरनेशनल ट्रेड इंस्टीट्यूशन कोलकाता के निदेशक व स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संयोजक डॉ. धनपत राम अग्रवाल रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में प्राकृतिक संसाधन, पूंजीगत संसाधन और मानव संसाधन का महत्वपूर्ण योगदान होता है। अमेरिका, चीन और भारत की जीडीपी का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने बताया कि जिन देशों ने नवाचार, अनुसंधान और पेटेंट पर अधिक ध्यान दिया, वही आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बने हुए हैं। डॉ. अग्रवाल ने आईपीआर के अंतर्गत नवीनता, आविष्कार और औद्योगिक अनुप्रयोग के महत्व को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि नए अनुसंधान ही नए रोजगार के अवसरों की नींव रखते हैं। भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा स्तर से ही नवाचार और अनुसंधान की सोच विकसित करने पर की जोर दिया। साथ ही आईपीआर इकोसिस्टम में रचनात्मकता, उत्पादन, तकनीकी और कानूनी पहलुओं की सही समझ को आवश्यक बताया।
डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी एवं यूआईईटी के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता की अहम भूमिका है और समय के साथ छात्रों की स्टार्टअप के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।

