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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय दृष्टिकोण (NCM - Jaipur - Resolution)

By Administrator • 15 Mar 2026
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय दृष्टिकोण (NCM - Jaipur - Resolution)

प्रस्ताव

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय दृष्टिकोण 


पूरी दुनिया एआई के असर से हिल गई है। इस मुद्दे पर बहुत मंथन हो रहा है, क्योंकि एक तरफ एआई ज़िंदगी को आसान बना रहा है, फ़ैसले लेने की रफ़्तार तेज़ कर रहा है, व्यवसाय विष्लेषण को ज़्यादा सटीक बना रहा है, मेडिकल डायग्नोसिस को बेहतर और किफ़ायती बना रहा है, ज़्यादा डिजिटल उत्पाद  बनाना मुमकिन बना रहा है, एक नई इकॉनमी को बढ़ावा दे रहा है, जिसे आम तौर पर ‘ऑरेंज इकॉनमी’ कहा जाता है, वहीं हमारी आबादी पर भारी बेरोज़गारी का खतरा मंडरा रहा है, जो पहले से ही हमारे युवाओं के लिए रोज़गार के मौकों की कमी से जूझ रही है। इस बदलते वैश्विक परिदृष्य में भारत के सामने यह महत्वपूर्ण प्रष्न है कि क्या वह केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपभोक्ता बना रहेगा, या अपनी स्वदेषी तकनीकी क्षमता और नवाचार के आधार पर इस क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका निभाये। जबकि, भारत आर्टिफिषियल इंटेलिजेंस से चलने वाले औद्योगिक क्रांति जैसे प्रौद्योगिकीय  बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, लेकिन एआई टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ बड़ी कंपनियों के पास होने के साथ, डेटा, जो इन एआई बड़ी कंपनियों को मज़बूत बना रहा है, वह सब हमारे जैसे विकासषील देषों से मिल रहा है। ऐसे में हम डिजिटल उपनिवेषीकरण  के मूक दर्षक बने नहीं रह सकते। यही नहीं एआई बड़े कारपोरेट और विदेषी कंपनियों के अधिपत्य में होने के कारण पक्षपातपूर्ण जानकारी का स्रोत बन रहा है। निजी डेटा भी कंपनियों को स्थानांतरित हो रहा है। बच्चों को पूर्व में जिन मानवीय मूल्यों की षिक्षा माता-पिता से मिलती रही, वो अब एआई के माध्यम से मिल रही है, जिससे उनके दिग्भ्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है। एआई एक प्रकार से गलत जानकारियां भी देने का ऐजेंट बन रहा है। अबोध बच्चों की सुरक्षा भी इसके कारण खतरे में पड़ रही है। 

हालांकि, एआई टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का नियंत्रण बना हुआ है, भारत ने  डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के निर्माण और बड़े पैमाने पर पहचान-प्रमाणीकरण में एआई/डेटा तकनीकों के उपयोग में विश्व स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है।। जैम ट्रिनिटी, यानी जन धन बैंक अकाउंट, आधार और मोबाइल बैंकिंग की मदद से, सरकार कल्याणकारी योजनाओं, जैसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी ), गरीबों के लिए घर और कई दूसरी योजनाओं को बनाने और लागू करने में मदद कर रही है, और भ्रष्टाचार को लगभग खत्म करने और सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने में सफल रही है। कृषि, स्वास्थ्य, षिक्षा, शहरी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सहित कई क्षेत्रों में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत की स्थिति विषिष्ट है क्योंकि उसके पास एआई विकास के लिए तीन ऐसे मूलभूत संसाधन उपलब्ध हैं जो विश्व के बहुत कम देषों के पास एक साथ मौजूद हैं- 1. विषाल बौद्धिक क्षमता और तकनीकी प्रतिभा, 2. डेटा की व्यापक और विविध संरचना, 3. और एक विकसित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई)। इन तीनों संसाधनों के उपयुक्त संयोजन से ही  भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक स्वदेषी और समावेषी मॉडल विकसित कर सकता है।

रोज़गार एआई का एक बड़ा षिकार है; और सभी क्षेत्रों में नौकरियों का सफाया एक सच्चाई बन चुकी है। मीडिया, मनोरंजन, कॉल सेंटर और यहाँ तक कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र भी एआई का असर झेलने लगा है। बड़ी फैक्ट्रियाँ एआई समर्थित कंप्यूटर प्रोग्रामों की मदद से सामान बनाती हैं, जिससे भारी बेरोज़गारी हो रही है। समाज में यह डर पैदा हो रहा है कि भविष्य में और भी बड़ी नौकरियाँ जा सकती हैं।

भारत सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी बताया गया है कि भारत के आकार और प्रति व्यक्ति आय उसके मुकाबले कम होने की वजह से, भारतीय श्रम बाज़ार में आर्टिफिषियल इंटेलिजेंस (एआई) का असर ज़्यादा होगा। इसमें चेतावनी दी गई है कि कंपनियों द्वारा एआई को बिना सोचे-समझे अपनाने से सभी की हालत खराब हो जाएगी और देष के ग्रोथ क्षमता को नुकसान होगा। सर्वेक्षण में कहा गया है, “सरकार को श्रम के उपयोग को टेक्नोलॉजी से बदलने से होने वाले मुनाफे पर टैक्स लगाना होगा।“ 

चूँकि स्वामित्व की दृष्टि से एआई  पर अमरीका और चीन का दबदबा है, इसलिए ज़्यादातर उपयोगकर्ता तो भारत समेत विकासषील देष हैं, साथ ही वे  इन एआई प्लेटफ़ॉर्म द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डेटा का स्रोत भी हैं। हमारे जैसे देष, विदेषी मालिकाना हक वाले एआई प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भर बने हुए हैं। इस इस प्रक्रिया में विकासषील देष डेटा संप्रभुता भी खो रहे हैं। इन टेक दिग्गजों के मालिकाना हक वाले एआई के दबदबे की वजह से छोटे खिलाड़ी, जिनमें छोटे और कुटीर उद्योग, सेवा एंटरप्राइज़ और कर्मी शामिल हैं, नुकसान में हैं। हम नीति बनाने में बड़ी टेक कंपनियों का अनुचित असर भी देखते हैं।

अपनी कमियों के बावजूद, एआई के लाभों को देखते हुए, नीति निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि एआई कैसे समानता के साथ मानवता की सेवा कर सकता है। इसके लिए देष में एक मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की आवष्यकता है, जिसके माध्यम से आम लोगों के लिए, समानता के आधार पर एआई तकनीकों का विकास और उपयोग सुगम बनाया जा सके। डेटा के निर्बाध प्रवाह को सुगम बनाने के लिए, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, एआई विकास की पहली पूर्व शर्त है। अच्छी खबर यह है कि संचार क्रांति के कारण, भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क है। स्वदेषी 4-जी नेटवर्क लगभग पूरे देष में विस्तारित किया गया है और देष ने अपना स्वदेषी 5-जीआई नेटवर्क भी विकसित कर लिया है। भारत को सबसे सस्ते डेटा की भूमि होने का गौरव भी प्राप्त है। फिर देष को डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा और गोपनीयता सुनिष्चित करते हुए डेटा एकत्र करने, संग्रहीत करने, संसाधित करने और साझा करने के लिए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की भी आवष्यकता है, एआई की बिना रुकावट ग्रोथ के लिए यह एक और तरह का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। देष को स्वदेषी एआई प्लेटफॉर्म्स की भी ज़रूरत है, जो केवल विदेषी तकनीकों पर निर्भर न हों, बल्कि देष के डेटा, भाषाओं, आवष्यकताओं और सुरक्षा हितों के अनुरूप एआई के विकास, तैनाती और प्रबंधन के लिए स्वदेषी फ्रेमवर्क उपलब्ध कराएँ।

साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क एआई के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक ज़रूरी हिस्सा है। एआई सिस्टम, डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर खतरों और हमलों से बचाने के लिए मज़बूत साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क बनाने की ज़रूरत है। आखिर में, लेकिन सबसे ज़रूरी, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आज की ज़रूरत है, ताकि नागरिकों, व्यवसायों और सरकारों को एआई, इसके उपयोग और इसके फ़ायदों के बारे में बताया जा सके।

हमें यह समझना होगा कि एआई को बढ़ावा देना और समाज और अर्थव्यवस्था के फ़ायदे के लिए इसके फ़ायदों का इस्तेमाल करना ज़रूरी है, और इसके लिए सही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) बनाना होगा, साथ ही हमें इसे सही सरकारी पॉलिसी के ज़रिए रेगुलेट करने की भी ज़रूरत है ताकि हम स्वस्थ एआई को बढ़ावा दे सकें। इसलिए, हमें विकास और विनियमन की दोहरी नीति अपनानी होगी, ताकि एआई का लोकतांत्रिकीकरण हो सके और वो सबके लिए समानता के साथ उपलब्ध हो सबके भले के लिए काम करे। 

भारत में आत्मनिर्भर एआई के लिए जरूरी है कि इसके लिए आवष्यक उपकरणों जैसे - सेमी कंडक्टर, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा एकीकरण, षिक्षा और कौषल विकास आदि उपायों को शीघ्रता से अपनाया जाये। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लोकतंत्रीकरण होना जरूरी है जिसका  मतलब है कि एआई तकनीक केवल बड़ी कंपनियों या शक्तिषाली संस्थाओं तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुँचे ताकि किसान और विद्यार्थी भी तथा अन्य सभी साधारण लोग इसका लाभ उठा सकें।

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