जलडमरूमध्य क्षेत्रों में स्थित देशों के अधिकारों की पुनः विवेचना हो। जिससे उनकी सार्वभौमिकता को सुरक्षित करते हुए विदेशी व्यापार में अवरोध करने का अधिकार, वहां स्थित देशों को वर्जित किया जाये, अन्यथा उन देशों को प्रतिबंधों से दंडित किया जाये। - विनोद जौहरी
होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के उल्लंघन की वर्तमान घटनाएं विशेषकर 2026 के संदर्भ में वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। ईरान द्वारा जहाजों को रोकना, टोल वसूलना और क्षेत्र पर नियंत्रण के दावे करना मुख्य रूप से समुद्री कानूनों के उल्लंघन के रूप में देखे जा रहे हैं। यमन के हूती विद्रोही (अंसार अल्लाह) लाल सागर में ड्रोन और मिसाइलों से लगातार व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों के कारण प्रमुख शिपिंग कंपनियों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के चक्कर लगा कर लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। लालसागर और होर्मुज जल डमरू मध्य में आतंकवादी गतिविधियों और हूती विद्रोहियों के हमलों ने वैश्विक समुद्री व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हूती विद्रोही गाजा युद्ध के जवाब में लाल सागर में इजराइल-संबंधित जहाजों को निशाना बना रहे हैं। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान समर्थित गतिविधियों के कारण टैंकरों पर हमले और तनाव बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल और उसके कॉन्टिनेन्टल शेल्फ के अंतर्गत आता है। यह जल डमरू मध्य उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान (मुसन्दम प्रायद्वीप) के बीच स्थित है। उत्तरी तट ईरान के पास है, और वहां के लारक और केश्म जैसे द्वीप ईरान के नियंत्रण में हैं, जो उन्हें इस जलमार्ग पर सामरिक लाभ देते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संकरे स्थान पर लगभग 33-39 किलोमीटर (21-27 समुद्री मील) चौड़ा है। चूँकि यह रास्ता 24 समुद्री मील से कम चौड़ा है, इसलिए होर्मुज की शिपिंग लेन पूरी तरह से ईरान और ओमान के प्रादेशिक जल में ओवर लैप होती है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, देश अपनी तट रेखा से 12 समुद्री मील तक प्रादेशिक जल पर अधिकार रखते हैं। इस कारण, जल डमरू मध्य के अंदर कोई भी हिस्सा ’मुक्तसमुद्र’ (हाइ सीज़) या शुद्ध रूप से सिर्फ अंतरराष्ट्रीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) नहीं रह जाता।
ईरान इस क्षेत्र के संसाधनों, जैसे तेल और गैस, पर अपने कॉन्टिनेन्टल शेल्फ और ईईज़ेड के अधिकारों का दावा करता है। रणनीतिक रूप से, जलडमरूमध्य के आठ प्रमुख द्वीपों में से सात पर ईरान का नियंत्रण है, जो इसके समुद्री संसाधनों पर उसके प्रभाव को मजबूत करता है।
यद्यपि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत यह एक ’अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग’ माना जाता है, जिससे होकर सभी जहाजों को ”पारगमन मार्ग” का अधिकार है। अधिकांश देश यहां ’ट्रांजिट पैसेज’ के अधिकार का समर्थन करते हैं, जिसका अर्थ है कि विदेशी जहाजों को बिना किसी अवरोध के पारगमन की अनुमति होनी चाहिए।
सामुद्रिक नियमों के अंतर्गत क्षेत्रीय विभाजन इस प्रकार समझा जा सकता है-
1 आंतरिक जलः तट के अंदर, पूर्ण राष्ट्रीय अधिकार।
2 प्रादेशिक समुद्रः तट से 12 समुद्री मील तक, देश का पूर्ण संप्रभु अधिकार।
3 सन्निहित क्षेत्रः 24 समुद्री मील तक, सीमा शुल्क और इमिग्रेशन कानून लागू।
4 विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड)ः 200 समुद्री मील तक, संसाधनों का अधिकार।
5 उच्च समुद्रः 200 मील से आगे, सभी देशों का समान अधिकार।
इसके विपरीत, ईरान का कहना है कि यहां केवल ’इनोसेंट पैसेज’ लागू होता है, जिससे से सुरक्षा के आधार पर जहाजों को रोकने या नियंत्रित करने का अधिक अधिकार मिलता है। ईरान होर्मुज जल डमरू मध्य के माध्यम से होने वाले व्यापार पर ”नियंत्रण” का दावा करता है और उसने सुरक्षा के बदले टोल वसूलने के लिए कानून भी तैयार किया है जबकि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अंतर्गत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के आर्टिकल 26 के अनुसार, तटीय देश विदेशी जहाजों पर केवल उनके जल क्षेत्र से गुजरने के आधार पर कोई शुल्क या टैक्स नहीं लगा सकते हैं।
अप्रैल 2026 में वर्तमान संघर्षों के कारण, ईरान ने इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर दिया है और कुछ ”मित्र देशों” (जैसे भारत और चीन) को ही प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित मार्ग दे रहा है।
लालसागर और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों ही वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं, लेकिन ये अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर स्थित हैं। लाल सागर अफ्रीका और एशिया के बीच एक बड़ा विशाल समुद्र/खाड़ी है जो स्वेज नहर से जुड़ता है, जबकि होर्मुज ईरान के दक्षिण में फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा मार्ग है। लालसागर, स्वेज नहर के माध्यम से एशिया और यूरोप के बीच मुख्य व्यापारिक मार्ग है। होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोक पॉइंट है, जहाँ से वैश्विक तेल का एक बड़ा भाग गुजरता है। लालसागर, बाब अल-मंडेब के जरिए अरब सागर से जुड़ता है। होर्मुज, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। लाल सागर के दक्षिणी भाग में हूती विद्रोहियों से खतरा रहता है। होर्मुज में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण जोखिम रहता है। दोनों ही मार्ग ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जहाँ से भारी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति दुनिया भर में होती है।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने और जहाजों को निशाना बनाने के समाचार हैं। इस क्षेत्र से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, और इन हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जहाजों की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में युद्ध पोत तैनात किए हैं।
इनोसेंट पैसेज के तहत ईरान अक्सर यह तर्क देता है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए जहाजों को रोक रहा है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जैसे अंतर्राष्ट्रीय मार्ग पर ’ट्रांजिट पैसेज’ के नियम लागू होते हैं, और उन्हें निलंबित नहीं किया जा सकता।
ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका और इज़राइल से संबद्ध जहाजों को निशाना बनाया है और उन्हें जब्त किया है, जिसे समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।
वर्तमान में इस इलाके में अनेक जहाज फंसे हुए हैं। ईरान ने होरमुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी रकम (टोल) वसूलने का प्रस्ताव रखा है, जिसका यूरोपीय संघ और संयुक्त अरब अमीरात ने कड़ा विरोध किया है। होरमुज की नाकेबंदी और शांति वार्ता विफल होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। इसलिए वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना या वहां तनाव बढ़ना भारत के लिए किसी झटके से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। इसमें से करीब आधा हिस्सा यानी 50 प्रतिशत तेल इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर भारत आता है। अगर यहां अवरोध उत्पन्न होता है, तो भारत को दूसरे देशों से महंगे दाम पर तेल खरीदना पड़ेगा। बड़ी कठिनाई यह भी है कि खाड़ी देशों से तेल भारत आने में सिर्फ 5 से 7 दिन लगते हैं, जबकि रूस या अमेरिका से तेल मंगाने में 25 से 45 दिन का समय लग जाता है। इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ेगा और देश में पेट्रोल-डीजल के दाम के साथ महंगाई भी बढ़ जाएगी।
मीडिया और समाचार पत्रों में ईरान सहित मध्यपूर्व देशों और अमेरिका में इस युद्ध से अभी तक कितने नागरिकों की मौतें हुई हैं, वैश्विक व्यापार में कुल कितना नुक्सान हुआ है और तेल पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था कितनी लड़खड़ाई है, इसका भी आंकलन सही नहीं है। वर्षों से होर्मूज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर में हूथी ईरान और यमन समर्थित आतंकवादियों ने सामुद्रिक व्यापार में जो अवरोध खड़े किये और विदेशी जहाजों पर आतंकी हमले किये हैं, उसकी यही परिणति सुनिश्चित थी। ईरान होर्मूज़ जलडमरूमध्य में विदेशी जहाजों के आवागमन और तेल आपूर्ति में बांधा डालकर, टोल टैक्स व अन्य लेवी लगाकर अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक कानून की अवहेलना कर रहा है, इसलिए वहां किसी भी तरह युद्ध विराम के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की शांतिरक्षा बल के नियंत्रण में विदेशी जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाये और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों को पश्चिम और मध्य पूर्व एशियाई देशों एवं युरोपीय जल मार्गों में संकरे जलडमरूमध्य क्षेत्रों में स्थित देशों के अधिकारों की पुनः विवेचना हो जिससे उनकी सार्वभौमिकता को सुरक्षित करते हुए विदेशी व्यापार में अवरोध करने का अधिकार वहां स्थित देशों को वर्जित किया जाये, अन्यथा उन देशों को प्रतिबंधों से दंडित किया जाये। अभी तक विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और कांटीनेंटल शेल्फ के अंतर्गत सामुद्रिक क्षेत्र पर अधिकारों को लेकर जलडमरूमध्य क्षेत्रों में विवाद की स्थिति है और एक ही क्षेत्र में कई देशों के अधिकारों को लेकर कानूनी व्यवस्था बहुत लचर व अपरिभाषित है।

