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विकास, विश्वास और बदलाव का नया खाका

By Dulichand Kaliraman • 20 Feb 2026
विकास, विश्वास और बदलाव का नया खाका

विकसित भारत का सपना केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि निरंतर नीति-सुधार, निवेश और जनभागीदारी से ही साकार होगा और यह बजट उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। - दुलीचंद कालीरमन

 

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। वैश्विक मंदी की आशंकाएँ, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और तकनीकी परिवर्तन - इन सबके बीच देश के सामने तेज़, समावेशी और टिकाऊ विकास की चुनौती है। ऐसे समय में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला नीति-पत्र है। यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार विकास की गति बनाए रखते हुए सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और निवेश- तीनों को संतुलित करना चाहती है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है। बजट में राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक नियंत्रित रखते हुए विकास पर खर्च बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है। यह संतुलन आसान नहीं होता, क्योंकि एक ओर सरकार को निवेश बढ़ाना है, दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन भी बनाए रखना है।

सरकार ने पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बनाए रखा है। यह संकेत देता है कि विकास का इंजन अभी भी सार्वजनिक निवेश ही रहेगा, जो निजी निवेश को आकर्षित करने का आधार बनेगा। बजट का सबसे बड़ा फोकस बुनियादी ढाँचे पर है। अवसंरचना विकास हेतु 12.2 लाख करोड़ रुपये सड़कों, रेल, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश की घोषणा की गई है। अवसंरचना पर खर्च का आर्थिक “गुणक प्रभाव” सबसे अधिक होता है - यह रोजगार पैदा करता है, उद्योगों को गति देता है और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है।

रेलवे के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जिसमें 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें, माल ढुलाई गलियारे और स्टेशन आधुनिकीकरण शामिल हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, ग्रामीण सड़कों का सुदृढ़ीकरण और मल्टी-मॉडल परिवहन पर विशेष बल दिया गया है। इससे न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार की लागत भी घटेगी।

कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बजट में 1.6 लाख करोड़ रूपये के आबंटन द्वारा इसे प्राथमिकता दी गई है। किसानों की आय बढ़ाने, जोखिम कम करने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए कई उपाय किए गए हैं। सिंचाई परियोजनाओं, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और कृषि तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया है।

कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाया गया है, जिससे किसानों को सस्ती दरों पर पूंजी उपलब्ध होगी। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सस्ती दरों पर अधिक पूंजी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया है। जिससे भंडारण, कोल्ड-चेन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश से कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ेगा और किसानों की आय में स्थिरता आएगी।

बजट में रक्षा के लिए लगभग 7.85 लाख करोड़ रूपये के आसपास प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। भारत पहले से ही विश्व के शीर्ष रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल है, और यह बजट उस प्रवृत्ति को जारी रखता है। यह राशि केवल युद्धक तैयारियों के लिए नहीं, बल्कि सैन्य आधुनिकीकरण, अनुसंधान, पेंशन और घरेलू उद्योग के विकास के लिए भी उपयोग की जाएगी।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च में वृद्धि इस बजट की महत्वपूर्ण विशेषता है। ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने, नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने और डिजिटल हेल्थ सेवाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है। महामारी के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा की आवश्यकता और स्पष्ट हो गई है। शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और शोध पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई पीढ़ी को भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह निवेश दीर्घकाल में भारत की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा।

भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इसे रोजगार में बदलना सबसे बड़ी चुनौती भी है। बजट में कौशल विकास कार्यक्रमों, स्टार्ट-अप समर्थन और श्रम-प्रधान उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए ऋण सुविधा, डिजिटल समर्थन और बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने की योजनाएँ शामिल हैं। यही क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार पैदा करता है, इसलिए इसकी मजबूती अर्थव्यवस्था की मजबूती से सीधे जुड़ी है।

भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाएँ जारी रखी गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और हरित तकनीक जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ तकनीकों में निवेश बढ़ाया गया है। इससे न केवल पर्यावरणीय लक्ष्य पूरे होंगे, बल्कि ऊर्जा आयात पर निर्भरता भी घटेगी।

डिजिटल अवसंरचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को विकास के नए इंजन के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और डेटा अवसंरचना पर निवेश बढ़ाया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार घटेगा और सेवाओं की पहुँच तेज़ होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार डिजिटल विभाजन को कम करेगा और नई आर्थिक गतिविधियों के द्वार खोलेगा।

मध्यम वर्ग के लिए कर ढाँचे में सरलीकरण और जीएसटी के माध्यम से कुछ राहत के संकेत दिए गए हैं, जिससे उपभोग बढ़ने की उम्मीद है। उपभोग में वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह उत्पादन और निवेश दोनों को प्रोत्साहित करती है। साथ ही कर आधार बढ़ाने और अनुपालन सुधारने के लिए तकनीक का उपयोग जारी रहेगा।

हालाँकि केन्द्रीय बजट विकासोन्मुख है, लेकिन चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना, रोजगार सृजन की गति बढ़ाना, ग्रामीण आय में सुधार और निजी निवेश को प्रोत्साहित करनाकृये सभी कठिन कार्य हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का प्रभाव भी भारत पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 संतुलित, दूरदर्शी और विकास-केंद्रित दस्तावेज़ के रूप में सामने आता है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार अल्पकालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन पर भी ध्यान दे रही है। अवसंरचना, कृषि, सामाजिक क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उद्योग - सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश दिखाई देती है।

यदि घोषित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है और निजी क्षेत्र भी सक्रिय भूमिका निभाता है, तो यह बजट भारत को तेज़, समावेशी और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे ले जा सकता है। विकसित भारत का सपना केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि निरंतर नीति-सुधार, निवेश और जनभागीदारी से ही साकार होगा और यह बजट उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

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